छत्तीसगढ़

BCCI संविधान में संशोधन केस: SC ने पूछा 75 साल के लोगों को क्यों चाहता है बीसीसीआई

नईदिल्ली I बीसीसीआई के संविधान में संशोधन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. इस मामले में SG तुषार मेहता बीसीसीआई की तरफ से पेश हुए हैं. सुनवाई के दौरान SG तुषार ने बीसीसीआई के संविधान में कूलिंग ऑफ पीरियड के बारे में कोर्ट को बताया. उन्होंने कहा, सिर्फ 2 टर्म के बाद 3 साल का कूलिंग ऑफ पीरियड है जबकि कुल कार्यकाल 9 साल का होता है.एसोसिएशनों में 70-साल की आयु सीमा और 9-वर्ष की कार्यकाल सीमा तय की गई है.

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, आप वहां 75 साल के लोगों को क्यों चाहते हैं? SG तुषार मेहता ने कहा कि मेरा कहना यह है कि उम्र के हिसाब को आईसीसी को तय करना है कि किस देश में क्या मानक या कसौटी हो. आईसीसी से कितना मिलता है,यह उस पर है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि अगर कोई महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन में दो कार्यकाल पूरे कर चुका हो तो वो बीसीसीआई के अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सकता? SG मेहता ने कहा कि मौजूदा नियम के मुताबिक तो यही होगा.

अमाइकस क्यूरी मनिंदर सिंह ने क्या कहा?

अमाइकस क्यूरी मनिंदर सिंह ने कहा कि प्रशासनिक या फील्ड का अनुभव होने के बावजूद उसे बाहर बैठना होगा. SG मेहता ने कहा कि अगर वो कोई स्टेडियम या फिर खेल परिसर का प्रोजेक्ट बना रहा हो तो पूरा करने तक भी उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होगा. उसे कार्यकाल पूरा होने पर बीच में ही पद छोड़ना होगा.

अमाइकस क्यूरी मनिंदर सिंह ने कहा कि बीसीसीआई जो प्रस्ताव कर रही हैं वह राज्य और बीसीसीआई के लिए दो अलग-अलग शर्तें हैं. उस पर मेरा मानना है कि न्यायालय को विचार करना चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या इसका समर्थन करते हैं? अमाइकस क्यूरी ने कहा, लेकिन यह सभी पदाधिकारियों के लिए होना चाहिए.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि वह भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की उस याचिका पर 13 सितंबर को सुनवाई करेगा, जिसमें अध्यक्ष और सचिव सहित अन्य पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर इसके संविधान में संशोधन करने के लिए शीर्ष न्यायालय की अनुमति मांगी गई है.बीसीसीआई ने प्रस्तावित संशोधन में अपने पदाधिकारियों के लिए कूलिंग-ऑफ अवधि को समाप्त करने की मांग की है, जिससे सौरव गांगुली और जय शाह संबद्ध राज्य क्रिकेट संघों में छह साल पूरे कर चुके होने के बावजूद अध्यक्ष और सचिव के पद पर बने रह सकेंगे.