कोरबा। एसईसीएल के खदान क्षेत्रों में भारी वाहनों के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दो घटनाएं सामने आई हैं। कुसमुंडा क्षेत्र में केएनआरसीएल कंपनी का 100 टन क्षमता वाला डंपर डंपिंग के दौरान अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ऑपरेटर गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, मानिकपुर खदान क्षेत्र में संचालित एससीसी कंपनी के कैंप परिसर में शुक्रवार को तीन ट्रांसफार्मरों में अचानक आग लग गई। आग के कारण क्रेशर को होने वाली बिजली आपूर्ति बंद हो गई, जिससे कैंप का काम ठप हो गया और कोयला सप्लाई भी प्रभावित हुई।
दोनों घटनाओं के बाद खदान क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों, भारी मशीनों के संचालन और आग से बचाव की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के कारणों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुसमुंडा में डंपिंग के दौरान पलटा 100 टन का डंपर
कुसमुंडा क्षेत्र में संचालित केएनआरसीएल कंपनी में डंपिंग के दौरान 100 टन क्षमता का भारी डंपर अनियंत्रित होकर पलटते हुए नीचे जा गिरा। हादसे में डंपर ऑपरेटर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे खदान से बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के दौरान ऑपरेटर ने डंपर से कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद खदान परिसर में कुछ देर के लिए काम रोकना पड़ा।
एक सप्ताह में डंपर से जुड़ी दूसरी घटना
बताया जा रहा है कि पिछले रविवार को भी इसी कंपनी का एक डंपर खदान में खड़ी मोटरसाइकिल के ऊपर चढ़ गया था। उस समय मोटरसाइकिल पर कोई सवार नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
एक सप्ताह के भीतर डंपर से जुड़ी दो घटनाएं सामने आने के बाद भारी वाहनों के संचालन, ड्राइवरों के प्रशिक्षण और खदान के भीतर यातायात प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खदानों में कोयला उत्पादन के लिए दिन-रात भारी मशीनों और डंपरों का संचालन होता है। ऐसे में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं।
मानिकपुर में तीन ट्रांसफार्मरों में लगी आग
दूसरी घटना एसईसीएल मानिकपुर खदान क्षेत्र में संचालित एससीसी कंपनी के कैंप में हुई। कैंप परिसर में लगे तीन ट्रांसफार्मरों में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें ऊंची उठने लगीं और ट्रांसफार्मर जलने लगे। आग के साथ उठते काले धुएं को देखकर कैंप में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
आग लगने के बाद कर्मचारी और अधिकारी सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे। गनीमत रही कि कोई कर्मचारी आग की चपेट में नहीं आया। सूचना मिलने पर नगर सेना और एसईसीएल की दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने मशक्कत कर आग पर काबू पाने और उसे फैलने से रोकने का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलने पर एससीसी और एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
बिजली आपूर्ति बंद, क्रेशर का काम ठप
जानकारी के अनुसार, कैंप में लगे इन्हीं ट्रांसफार्मरों से क्रेशर को बिजली की आपूर्ति होती है। क्रेशर के माध्यम से कोयला कटिंग और सप्लाई का काम किया जाता है। आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई, जिससे कैंप का काम ठप हो गया और कोयला सप्लाई प्रभावित हुई।
आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। शुरुआती आशंका ओवरलोड या शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है, लेकिन कंपनी प्रबंधन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घटना की सूचना मानिकपुर चौकी पुलिस को भी दी गई।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी सवाल
बताया गया कि आग लगने के बाद मौके पर मौजूद फायर सेफ्टी उपकरणों से आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन कर्मचारी उस पर काबू नहीं पा सके। इसके बाद दमकल वाहनों की मदद ली गई। घटना के बाद कैंप में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा उपकरणों की स्थिति और संभावित लापरवाही को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं देने का आरोप
इधर, स्थानीय बेरोजगार युवाओं में भी कंपनी को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है और बाहर से आए लोगों को काम पर रखा जा रहा है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद खदान क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा, भारी वाहनों के संचालन की जांच और सुरक्षा ऑडिट की मांग उठ रही है। फिलहाल डंपर हादसे और ट्रांसफार्मरों में आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।




