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‘हम न होते तो आप फ्रेंच बोल रहे होते’: ट्रंप के बड़बोलेपन पर किंग चार्ल्स का मजेदार तंज, इतिहास की दिला दी याद

वॉशिंगटन। अमेरिका दौरे पर पहुंचे ब्रिटेन के किंग चार्ल्स-III ने व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा मजेदार तंज कसा कि माहौल हल्का-फुल्का हो गया, लेकिन संदेश गहरा था। बात इतिहास और भाषा से जुड़ी थी और निशाने पर थे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। पूरी बात को ऐसे समझिए कि दरअसल, ट्रंप ने उनके साथ बातचीत के दौरान कहा था कि अगर अमेरिका न होता तो यूरोप के कई देश आज जर्मन भाषा बोल रहे होते। ट्रंप का इशारा यूरोप और जर्मनी के उस युद्ध की ओर था, जहां संभवत: जर्मनी का यूरोप के देशों पर कब्जा होता और ये देश खासकर ब्रिटेन भी हिटलर की बोली बोलने लगता।

देखा जाए तो ये कोई नई बात नहीं है कि ट्रंप ने अपने घर में बुलाकर किसी दूसरे देश के मेहमान के साथ अपना बड़बोलापन दिखाया हो। लेकिन इस बार उनकी ये चाल शायद उनपर भारी पड़ गई, क्योंकि ट्रंप के अंदाज में ही किंग चार्ल्स ने ऐसा जवाब दिया, जो खूब चर्चा में रहा और लोगों ने इसपर जमकर ठहाके भी लगाए।
आप फ्रेंच बोल रहे होते- किंग चार्ल्स
शुरुआत कुछ ऐसे हुई जब ट्रंप ने ये तंज कसा तो इसी बयान को पकड़ते हुए किंग चार्ल्स ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, मिस्टर प्रेसिडेंट, आपने कहा कि अगर अमेरिका न होता तो यूरोप जर्मन बोल रहा होता। मैं यह कहना चाहूंगा कि अगर हम (ब्रिटेन) न होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते। किंग चार्ल्स का यह जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े। यह टिप्पणी इतिहास की उस पृष्ठभूमि की ओर इशारा करती है, जब यूरोप में अलग-अलग ताकतों का प्रभाव था और भाषाओं पर भी उसका असर पड़ता था।

अब समझिए क्या कहता है इतिहास?
गौरतलब है कि अमेरिका और यूरोप की ताकत को लेकर दिए गए बयानों के बीच असली इतिहास क्या कहता है, इसे समझना जरूरी है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर अमेरिका न होता तो यूरोप के कई देश जर्मन भाषा बोल रहे होते, जिसका इशारा दूसरे विश्व युद्ध की तरफ माना जा रहा है। वहीं ब्रिटेन के किंग किंग चार्ल्स III ने जवाब में इतिहास का दूसरा पहलू सामने रखा।

किंग चार्ल्स का इशारा उस दौर की ओर था जब 1776 में अमेरिका ने ब्रिटेन से आजादी की घोषणा की थी, लेकिन यह जीत अकेले संभव नहीं थी। उस समय फ्रांस ने अमेरिका को अहम सैन्य मदद दी थी, जिसके बिना अमेरिका की आजादी मुश्किल मानी जाती है। इतना ही नहीं, अमेरिका बनने से पहले वहां के कई हिस्सों पर फ्रांस का कब्जा था और उसे न्यू फ्रांस कहा जाता था।

जब ब्रिटेन के सौनिकों ने जला दिया था व्हाइट हाउस
हालांकि इसके बाद भी ब्रिटेन और अमेरिका के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ और 1812 में दोनों के बीच युद्ध हुआ, जिसे वॉर ऑफ 1812 कहा जाता है। इसी युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने वॉशिंगटन डीसी पर कब्जा कर लिया और 1814 में व्हाइट हाउस को आग के हवाले कर दिया था। यानी ट्रंप जहां दूसरे विश्व युद्ध और जर्मनी के प्रभाव की बात कर रहे थे, वहीं किंग चार्ल्स ने उससे भी पहले के इतिहास अमेरिका की आजादी और ब्रिटेन-फ्रांस की भूमिका की याद दिलाई।

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