Home » कोरबा » कोरबा: सिंघाली में 15 फीट धंसी जमीन, धान की फसल बर्बाद, किसानों में दहशत, SECL अधिकारियों ने मिट्टी फिलिंग का दिया आश्वासन

कोरबा: सिंघाली में 15 फीट धंसी जमीन, धान की फसल बर्बाद, किसानों में दहशत, SECL अधिकारियों ने मिट्टी फिलिंग का दिया आश्वासन

कोरबा। कोरबा के बांकीमोगरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिंघाली की बांकी बस्ती में एसईसीएल की बंद भूमिगत खदान के ऊपर अचानक 10 से 15 फीट जमीन धंस गई। भू-धंसान की चपेट में आने से किसान हरियर सिंह के खेत में लगी धान की पूरी फसल बर्बाद हो गई। लगातार बारिश के कारण जमीन गीली होने से आसपास भी भू-धंसान का खतरा बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बांकी बस्ती में एसईसीएल की 4 नंबर भूमिगत खदान संचालित होती थी। यहां डि-पिलरिंग पद्धति से कोयला निकाला गया था। वर्तमान में खदान बंद है। खनन के दौरान जमीन के नीचे खाली जगह बनने के कारण अब ऊपरी सतह धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

खेत में बना गहरा गड्ढा

इस बार हरियर सिंह के खेत का करीब 10 से 15 फीट हिस्सा नीचे धंस गया, जिससे खेत में बड़ा गड्ढा बन गया और वहां लगी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में भू-धंसान की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले अगमपुर और सुराकछार बस्ती में भी बंद भूमिगत खदानों के ऊपर जमीन धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

घटना की सूचना मिलने के बाद एसईसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने भू-धंसान वाली जगह पर मिट्टी की फिलिंग कराने का आश्वासन दिया है।

बैकफिलिंग नहीं होने पर बढ़ता है खतरा

जानकारों के अनुसार, भूमिगत खनन के बाद जमीन के नीचे खाली सुरंगें और हिस्से रह जाते हैं। इन्हें भरने के लिए बंद खदानों में बैकफिलिंग की जाती है, जिससे जमीन धंसने का खतरा कम हो सके। आरोप है कि कई बंद खदानों में पर्याप्त बैकफिलिंग नहीं कराई गई है।

सुराकछार भूमिगत खदान में कुछ समय तक राखड़ मिश्रित पेस्ट से बैकफिलिंग किए जाने की जानकारी है। इसके अलावा रेत से भी भराव किया जा सकता है, लेकिन यह अपेक्षाकृत महंगा तरीका माना जाता है।

किसान ने मांगा मुआवजा

भू-धंसान से फसल बर्बाद होने के बाद प्रभावित किसान हरियर सिंह ने प्रशासन से मुआवजा देने और खेत को सुरक्षित कराने की मांग की है। बारिश के दौरान जमीन के और धंसने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों में भी चिंता बनी हुई है।

Facebook
X
WhatsApp
Telegram