तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान का पूरा शीर्ष नेतृत्व मौजूद था और अमेरिका चाहता तो एक ही हमले में सभी को खत्म कर सकता था।
एक्सिओस से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “हालांकि मैंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि फिर बातचीत के लिए कोई नहीं बचता।” ट्रम्प ने जनाजे में रो रहे लोगों पर भी तंज कसते हुए कहा कि शायद ये आंसू भी नकली हों।
ट्रम्प के बयान पर ईरान ने पलटवार किया। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर लिखा, “लोगों को मारा जा सकता है, लेकिन विचारों को नहीं। आपके पास न सभ्यता है, न इतिहास और न सम्मान।”
दूसरी तरफ तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तीसरे दिन लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी है। इस दौरान ‘डेथ टु अमेरिका’ और ‘डेथ टु इजराइल’ के नारे लगे।
खामेनेई की 14 महीने की पोती को दी गई अंतिम विदाई
खामेनेई के अंतिम संस्कार में उनकी 14 महीने की पोती ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी को भी अंतिम विदाई दी गई। जनाजे की नमाज के दौरान जहरा का छोटा ताबूत खामेनेई के ताबूत के पास रखा गया। दोनों के लिए एक साथ अंतिम नमाज अदा की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए अमेरिकी-इजराइली हमले में जहरा की मां बोशरा खामेनेई की भी मौत हो गई थी। जनाजे की नमाज में जहरा के पिता मोहम्मद जवाद मोहम्मदी गोलपायगानी भी मौजूद रहे।
इमाम रजा की दरगाह खास क्यों है जहां खामेनेई को दफनाया जाएगा?
शिया संप्रदाय के कुल 12 पवित्र इमामों में से इमाम रजा एकमात्र ऐसे इमाम हैं जिन्हें ईरान की धरती पर दफनाया गया है। बाकी के सभी इमाम या तो सऊदी अरब (मदीना) में हैं या इराक (नजफ, करबला, सामर्रा) में।
इमाम रजा शिया इस्लाम के आठवें इमाम माने जाते हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से डरकर तत्कालीन शासक अब्बासी खलीफा ने जहर देकर हत्या करा दी थी।
जहां इमाम रजा को दफनाया गया, उस जगह का नाम बाद में ‘मशहद’ (शहीद होने की जगह) पड़ गया, जो आज ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। मशहद शिया मुसलमानों के लिए मक्का, मदीना और करबला के बाद सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहां हर साल दुनिया के कई देशों से लाखों शिया श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
खामेनेई के जनाजे में तीन बेटे पहुंचे, मुजतबा दूर रहे
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में रविवार को उनके तीन बेटे मसूद, मेयसम और मुस्तफा शामिल हुए। उनके साथ रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी भी मौजूद रहे।
हालांकि खामेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई समारोह से दूर रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल से जान का खतरा होने के कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लिया।




