तेहरान। अमेरिका-ईरान के बीच अप्रैल में शुरू हुई बातचीत के दौरान अमेरिका को डर था कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भिजवाया।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को डर था कि अगर दोनों वार्ताकारों की हत्या हुई तो युद्धविराम और शांति प्रक्रिया टूट जाएगी। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली एक बैठक से पहले भी ईरान को हमले का खतरा था। इसी कारण पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। लौटते समय भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और डेलिगेशन सड़क के जरिए तेहरान पहुंचा।
खामेनेई के ताबूत को हत्या वाली जगह ले जाया गया
खामेनेई का ताबूत गुरुवार को उस जगह ले जाया गया, जहां 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में उनकी हत्या हुई थी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह कार्यक्रम बिना किसी पूर्व सूचना के आयोजित किया गया।
इसके बाद 4 और 5 जुलाई को तेहरान में खामेनेई की दो दिन की सार्वजनिक अंतिम विदाई होगी। पहले दिन लोग अंतिम दर्शन करेंगे, जबकि दूसरे दिन नमाज-ए-जनाजा और अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि अंतिम विदाई में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कई मार्गों पर अंतिम यात्रा निकालने और मेट्रो-बस सेवाएं पूरी क्षमता से चलाने की तैयारी की है।
खामेनेई के ताबूत पर लाल झंडा रखा गया
खामेनेई के विदाई समारोह के दौरान उनके ताबूत पर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह का लाल झंडा रखा गया। यह झंडा शिया परंपरा में शहादत, बलिदान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह प्रतीक इमाम हुसैन की करबला में हुई शहादत से जुड़ा है। ईरानी नेतृत्व खामेनेई की मौत को भी उसी तरह की शहादत के रूप में पेश कर रहा है। खामेनेई का अंतिम संस्कार 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में किया जाएगा।




