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सुप्रीम कोर्ट में गाली देने वाले वकील की कहानी आई सामने, दो लड़कियों को कर चुका है परेशान; ईमेल हुआ लीक

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के सामने अपशब्द कहने वाला प्रबल प्रताप यादव इटावा के नगला जयलाल, भाली भरथना का रहने वाला है। प्रबल प्लानिंग के तहत सुप्रीम कोर्ट गया था। प्रबल की एक ईमेल पुलिस को मिली है, जिसमें उसने स्पष्ट लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा, पूरे देश में हाईलाइट हो जाऊंगा।

छानबीन में सामने आया है कि प्रबल अपने प्रकरण को उछालने और हाईलाइट होने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। यही वजह है कि उसने अपना मामला खुद लड़ने के लिए आवेदन किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विकासनगर स्थित डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी में काम करता था। नौकरी के दौरान उसने दो लड़कियों को परेशान किया था। इसमें एक हिंदू और दूसरी मुस्लिम युवती थी। दोनों युवतियों ने कंपनी के अधिकारियों से प्रबल की लिखित शिकायत की थी। इसके बाद कंपनी ने प्रबल को नौकरी से बाहर निकाल दिया था। कंपनी से बदला लेने के लिए उसने कंपनी पर कई तरह के भ्रष्टाचार, टैक्स चारी और गबन के आरोप लगाए थे।

यह है मामला

 

डुप्लेक्स टेक्नोलॉजीज सर्विसेज प्रा. लि. के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियमितता के आरोप में एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग को लेकर प्रबल ने स्पेशल सीजेएम कस्टम की अदालत में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया था, जबकि प्रबल केस दर्ज कराना चाहता था। कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी। प्रबल ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश देने की मांग की थी कि कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। मांग पूरी नहीं होने पर वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां शुक्रवार को उसने अपशब्द भाषा बोले।

पिता ने कहा कि तनाव में था, इसलिए गलती हो गई

UP: Story of abusive lawyer in Supreme Court comes to light, he harassed two girls; email leaked
प्रबल के मामा-पिता, ताऊ व अन्य परिजन

सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना मामला लड़ने के दौरान जजों से बदसलूकी करने वाले प्रबल प्रताप यादव जिले की भरथना तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भोली के गांव नगला जयलाल के रहने वाले हैं। प्रबल प्रताप के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को कहा कि बेटा आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इस बीच उसके साथ साइबर फ्रॉड भी हो गया। इसकी शिकायत भी नहीं सुनी गई थी। इसके लिए ही उसने कोर्ट में अर्जी लगाई थी। आर्थिंक तंगी के बीच कहीं सुनवाई न होने की वजह से वह तनाव में था। इसलिए ही उससे शायद कोर्ट में गलती हो गई।

सुरेंद्र ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा प्रबल है। बेटियों की शादी हो चुकी है। सिर्फ दो बीघा खेती है। ऐसे में घर की आर्थिक स्थिति कमजोर है। आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए प्रबल लगातार पढ़ाई करके अच्छी नौकरी करना चाहता था। उसने तीन साल पहले जिले के चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज से बीएड किया था। सरकारी नौकरी न मिलने की वजह से दो साल पहले वह लखनऊ विवि से वकालत करने चला गया था।

वहां वह कैंपस के पास ही किराए के एक कमरे में रह रहा था। खर्चा चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाता था। वह एक निजी कंपनी में नौकरी भी कर रहा था। इसी बीच वह किसी साइबर फ्रॉड का शिकार हो गया था। जिसमें उसका काफी नुकसान हुआ था। प्रबल के ताऊ रविंद्र सिंह ने बताया कि इस फ्रॉड की शिकायत उन्होंने संबंधित थाने में की थी। वहां सुनवाई नहीं हुई तो पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया लेकिन किसी नहीं सुना। इस पर उसने कोर्ट से मुकदमा दर्ज कराया था। निचली कोर्ट से भी न्याय न मिलने पर प्रबल सुप्रीम कोर्ट गया था।

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