नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET पेपर लीक को लेकर विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को कहा, ‘सरकार अपने वादे पर कायम है। छात्रों के खिलाफ कोई FIR नहीं होगी।’
मेहता ने ये भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों को लेकर जिन 2700 से ज्यादा लोगों पर FIR दर्ज हुई हैं, इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी 3 मांगें थी, जो सरकार ने मान ली थीं। इनमें एक मांग यह भी थी कि सरकार विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। मामले पर अब 18 अगस्त को सुनवाई होगी।
कोर्ट बोला- जिन जवानों ने सख्ती की, उन्हें न बचाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया गया है। वकील वृंदा ग्रोवर ने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ली जाएंगी या रद्द की जाएंगी। इस पर मेहता ने कहा कि कानूनी तौर पर जो भी तरीका सही हो, सरकार अपने वादे पर कायम है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई पुलिस अधिकारी जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करता है, तो उसे बेवजह बचाया नहीं जाना चाहिए। और ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी कुख्यात अपराधी को बचाया जाए।
परीक्षाओं में गड़बड़ी और NEET पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन 36 दिन तक चला था। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था।
कोर्ट का फोकस 2 मुद्दों पर…
- बेंच प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायलों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक SIT बना सकती है।
- कोर्ट यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि पुलिसकर्मियों पर हमले छात्रों ने किए थे या छात्रों की भीड़ में घुस आए शरारती तत्वों ने।
‘फेशियल रिकग्निशन’ के इस्तेमाल के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाराज्यसभा के एक सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) और बायोमेट्रिक निगरानी के दूसरे तरीकों के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के केरलम से राज्यसभा सदस्य एए रहीम ने मांग की है कि शांतिपूर्ण सार्वजनिक सभाओं में बिना किसी भेदभाव के बायोमैट्रिक निगरानी का इस्तेमाल असंवैधानिक घोषित किया जाए।




