छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ : CIMS में 18 साल की लड़की की मौत पर हंगामा, कोविड जांच में ही लगा दिए 2 घंटे; ऑक्सीजन लगाने से पहले दम तोड़ा

बिलासपुर I छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के सिम्स में 18 साल की लड़की की मौत होने पर परिजनों ने जमकर हंगामा मचाया और शव रखकर प्रदर्शन करने लगे। आरोप है कि युवती गंभीर हालत में तड़पती रही, फिर भी डॉक्टरों ने उसे भर्ती नहीं किया। पहले कोरोना जांच के बहाने दो घंटे तक रखे रहे और फिर बाद में ICU के बजाए जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया। वहां भी उसे ऑक्सीजन नहीं लगाया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। शव रखकर हंगामा मचाने पर प्रबंधन ने पुलिस को बुला लिया और परिजन को धमकाना शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार कोनी की रहने वाली रानू सोनवानी (18) पिता राजकुमार सोनवानी को बुधवार अचानक सीने में दर्द उठा और उसे उल्टी होने लगी। उसकी हालत देखकर परिजन बुधवार दोपहर उसे लेकर सिम्स पहुंचे। लेकिन, यहां उसे भर्ती करने और उपचार करने के बजाए डॉक्टरों ने बिठाए रखा, जिसकी वजह से उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई।

जनरल वार्ड में कर दिया भर्ती
युवती की हालत गंभीर होने के बाद भी डॉक्टरों ने उसे सीधे ICU में भर्ती नहीं किया। बल्कि जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया। यहां समय पर डॉक्टरों ने उसकी जांच नहीं की और न ही उसे ऑक्सीजन लगाया। ऑक्सीजन लगाने में ही डॉक्टरों ने डेढ़ घंटे की देरी की। इसके चलते युवती की मौत हो गई।

शव ले जाने से किया इंकार, लापरवाही के लगाए आरोप
बेटी को मृत घोषित करने के बाद परिजनों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया। उन्होंने शव को घर लेकर जाने से इंकार कर दिया गया। मृतका के चाचा शिवा सोनवानी ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्ची की जान गई है। गंभीर हालत को देखते हुए भी ऑक्सीजन लगाने में देरी की गई। कोई सीनियर डॉक्टर भी समय पर देखने नहीं आए। वहीं, इलाज में देरी होने के कारण उनकी बेटी की मौत हो गई।

कोरोना जांच में ही लगा दिया दो घंटा
परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार बुलाने के बाद भी कोई डॉक्टर मरीज को देखने के लिए तैयार नहीं हुआ और कोरोना जांच कराने के लिए बोलते रहे। करीब दो घंटे तो केवल कोरोना जांच में ही लगा दिए। इसकी वजह से उनकी बेटी की तबीयत और बिगड़ गई।

पहले बता देते तो हम प्राइवेट अस्पताल ले जाते
परिजनों का कहना था कि मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए भी उसे जानबूझकर जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया गया। समय रहते उसे ICU में इलाज मिल जाता तो उसकी मौत नहीं होती। CIMS में उन्हें यदि समय रहते बता दिया जाता कि यहां इलाज नहीं हो पाएगा आप निजी अस्पताल ले जाओ तो हम अपनी बच्ची को प्राइवेट अस्पताल ले जाते।

पुलिस की समझाइश पर शांत हुआ मामला
परिजनों के हंगामा मचाने और शव ले जाने से मना करने के बाद उल्टा सिम्स के डॉक्टर और स्टाफ उन्हें धमकाने लगे। इस दौरान उन्होंने पुलिस को बुला लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाइश दी। फिर भी परिजन कार्रवाई करने की मांग पर अड़े रहे। बाद में समझाइश के बाद परिजन शव लेकर जाने के लिए तैयार हुए।

डीन बोले- मरीज को प्राइवेट अस्पताल से लेकर आए थे परिजन
इधर, सिम्स के डीन डॉ.के.के सहारे ने बताया कि बच्ची को परिजन गंभीर हालत में किसी निजी अस्पताल से लेकर सिम्स आए थे। इसके चलते उसकी स्थिति काफी गंभीर थी। डॉक्टरों ने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया। सिम्स में 150 सिलेंडर एक्सट्रा है, जिसे इमरजेंसी के लिए रखा गया है। ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्ची की मौत नहीं हुई है।