छत्तीसगढ़

क्या सियासी संकट के बाद भी गहलोत बने रहेंगे CM या सोनिया बदलेंगी कमान? आज फैसला

नईदिल्ली I राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साफ कर दिया है कि उनके लिए पद कोई मायने नहीं रखता और वह पार्टी को मजबूत बनाना चाहते हैं. इसके साथ ही वह कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कांग्रेस हाईकमान का हर फैसला छोड़ दिया है. उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राजस्थान के मुख्यमंत्री के बारे में एक-दो दिन में फैसला ले लेंगी. ऐसे में सभी राजनीतिक दलों समेत आम जनता तक की निगाहें राजस्थान पर टिकी हुई हैं.

हालांकि, अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना समर्थन दे दिया है. साथ ही अपनी उम्मीदवारी भी वापस ले ली है. गहलोत ने खड़गे का प्रस्तावक बनने के बाद मीडिया से रूबरू होकर कहा कि मेरे लिए, कोई पद महत्वपूर्ण नहीं है. देश में कांग्रेस को मजबूत बनाने की जरूरत है और हर भारतीय ऐसा कह रहा है.

CM पद से इस्तीफे पर क्या बोले गहलोत?

कांग्रेस की सर्वोपरी नेता सोनिया गांधी से गुरुवार यानी 29 सितंबर को हुई मुलाकात में राजस्थान के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश के सवाल पर गहलोत बचते नजर आए. उन्होंने कोई सीधा जवाब न देकर कहा कि मैं गांधी परिवार के आशीर्वाद से पिछले 50 साल से कई पदों पर रहा हूं. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी ने मुझे अपना आशीर्वाद दिया. मेरे लिए पद मायने नहीं रखता, बल्कि यह मायने रखता है कि पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए. मैं इसके लिए हर संभव कोशिश करूंगा.

‘मैं वही करूंगा, जो आलाकमान का फैसला’

अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि अगर मैं अभी कोई पद छोड़ता हूं, तो कहा जाएगा कि जब कांग्रेस संकट से गुजर रही थी तो, अशोक गहलोत भाग रहे हैं… मैं वही करूंगा जो आलाकमान का फैसला होगा. आपको बता दें कि जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक नहीं हो पाने और संबंधित घटनाक्रम के लिए गहलोत ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर माफी मांगी थी. साथ ही कहा था कि वह अब अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे. राजस्थान से जुड़े सियासी घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के संदर्भ में सोनिया गांधी अगले एक-दो दिन में फैसला करेंगी.