छत्तीसगढ़

महिला के 56 टुकड़े किए, पकाकर खाया! रूह कंपा देगी केरल में नरबलि की कहानी

नईदिल्ली I केरल में कथित तौर पर नरबलि देने के इरादे से दो महिलाओं की हत्या के मामले के तीन आरोपियों को आज बुधवार सुबह अदालत में पेश किया गया जहां उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामले में आरोपी भागवल सिंह, उसकी पत्नी लैला और मोहम्मद शफी के बयान कल ही दर्ज कर लिए गए थे. आरोपियों ने अपनी आर्थिक तंगी दूर करने और समृद्धि प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर महिलाओं की बलि दी थी. पुलिस का कहना है कि हत्यारों ने एक महिला को 56 टुकड़ों में काटा था और उसे खाया भी. पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद आरोपियों ने महिला के शव के मांस भी खाया.

राज्य पुलिस ने विस्तृत पूछताछ के लिए आरोपियों की 10 दिन की हिरासत की मांग की थी. हालांकि एर्नाकुलम जिल सत्र कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 26 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

आर्थिक तंगी दूर करने के लिए नरबलि

मीडिया की खबरों के अनुसार, आरोपियों की ओर से अदालत में अधिवक्ता बीए अलूर पेश हुए जिन्हें कई सनसनीखेज मामलों में आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाना जाता है. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी आर. निशानथिनी ने मंगलवार रात कहा था कि प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि अपराध आर्थिक तंगी दूर करने और समृद्धि प्राप्त करने के लिए किया गया.

अधिकारी ने पथानामथिट्टा के एलानथूर में दंपित के घर से महिलाओं के शव के टुकड़ों को निकालने के अभियान का नेतृत्व किया था.

दीवारों और फर्श पर पड़े थे खून के छींटे

मारी गई महिलाओं (पद्मा और रोसलिन) के शरीर को कई टुकड़ों में काट दिया गया और घर पिछवाड़े में दफन कर दिया गया. काले जादू की रस्म के तहत दीवारों और फर्श पर खून के छींटे पड़े हुए थे. पुलिस ने कहा कि ये महिलाएं सड़कों पर लॉटरी टिकट बेचकर अपनी आजीविका चलाती थीं.

मृतक के कटे हुए शरीर के अंगों को कल मंगलवार को पथानामथिट्टा के एलनथूर गांव में दंपति के घर के पिछवाड़े से निकाला गया. पुलिस ने बताया कि पीड़ितों के शरीर के अंगों को टुकड़ों में काट दिया गया और दो स्थानों पर दफनाया गया. पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है.

पुलिस के अनुसार, महिलाओं की उम्र 50 से 55 साल के बीच थी. इनमें से एक कदवंथरा और दूसरी नजदीक स्थित कालडी की रहने वाली थी. वे इस साल क्रमश: सितंबर और जून से लापता थीं. उनकी तलाश में जुटी पुलिस को तफ्तीश के दौरान घटना के कथित तौर पर मानव बलि से जुड़े होने की जानकारी मिली थी.

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इन हत्याओं पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मानसिक रूप से बीमार लोग ही इस तरह के अपराध कर सकते हैं. उन्होंने एक बयान में कहा कि इस तरह के काला जादू और जादू टोना की रस्मों को सभ्य समाज के लिए एक चुनौती के रूप में ही देखा जा सकता है.

इस बीच नरबलि का मामला सामने आने के बाद राज्य में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के युवा संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने मंगलवार को पास के एलंथूर में उस घर की ओर विरोध मार्च निकाला, जहां काले जादू के तहत कथित तौर पर महिलाओं की बलि दी गई थी.

डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि इस तरह की घटना केरल राज्य के लिए एक अपमानजनक बात है जो देश में सामाजिक, सांस्कृतिक और साक्षरता के क्षेत्र में एक आदर्श है. हालांकि पुलिस ने कहा कि उन्होंने घर के आगे मार्च रोक दिया क्योंकि शरीर के अंगों को निकालने सहित अपराध स्थल की जांच जारी थी.

युवा संगठन ने बाद में एक विरोध-सभा आयोजित की और कहा कि यह शर्म की बात है कि लोग अभी भी अंधविश्वास वाली मान्यताओं में विश्वास रखते हैं. डीवाईएफआई की जिला इकाई के अध्यक्ष साजिथ पी आनंद ने कहा, “केरल जैसे राज्य से मानव बलि की खबर आ रही है जो बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक है. इस तरह की घटना राज्य के लिए एक अपमान है जो विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और साक्षरता कारकों में देश के बाकी हिस्सों के लिए एक आदर्श है.”