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छत्तीसगढ़: भूपेश-सौम्या के आपत्तिजनक एआई वीडियो मामले में एफआईआर दर्ज, इंस्टाग्राम आईडी बैन

भिलाई । सोशल मीडिया पर वायरल हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सौम्य चौरसिया के एआई जनरेटेड वीडियो को लेकर दुर्ग जिले में भिलाई नगर पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। इस मामले में जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर की शिकायत पर भिलाई नगर थाने में सोमवार देर रात एफआईआर दर्ज की गई। कांग्रेस नेताओं ने इस वीडियो को फर्जी और आपत्तिजनक बताते हुए पहले ही पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

यह वीडियो इंस्टाग्राम पर “कांग्रेस पोल खोल” और “रैंडम छत्तीसगढ़” नाम के अकाउंट से शेयर किया गया था। इसमें भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया को लेकर आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया गया था। वीडियो वायरल होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसएसपी से मुलाकात की और आपत्ति दर्ज करवाई थी। इसके बाद सोमवार की रात को आरोपी पर बीएनएस की धारा 353(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

रविवार को एसएसपी से मिले थे कांग्रेसी

रविवार को कांग्रेस नेताओं ने दुर्ग के पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल से मुलाकात कर इस मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद सोमवार को पार्टी की ओर से जिले के सभी थानों में शिकायत दर्ज कराई गई। शाम तक जिले के कई इलाकों जैसे जामगांव आर, कुम्हारी, भिलाई-3, नंदिनी नगर अहिवारा, जामुल, धमधा, अंडा, जेवरा सिरसा और रानीतराई में कांग्रेस कार्यकर्ता थानों पहुंचे और विरोध जताया।

इंस्टाग्राम आईडी बैन, आरोपी की तलाश शुरू

मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस हरकत में आई। जांच के दौरान जिन दो इंस्टाग्राम आईडी से वीडियो पोस्ट किया गया था, उन्हें बैन कर दिया गया और प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ता अभी भी इन अकाउंट को चलाने वालों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। पुलिस ने जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। साइबर टीम वीडियो की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वीडियो कहां से बनाया गया और किसने इसे सबसे पहले पोस्ट किया।

महिला आयोग ने भी लिखा था पत्र

इधर राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने खुद संज्ञान लेते हुए इसे संवेदनशील मामला बताया और दुर्ग एसपी को पत्र भेजा। आयोग ने साइबर सेल को निर्देश दिया है कि वीडियो की तकनीकी जांच कर उसके असली स्रोत का पता लगाया जाए और इसे फैलाने वालों की पहचान की जाए। महिला आयोग ने साफ कहा है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कर किसी की छवि खराब करना, खासकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री बनाना, गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

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