नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को एकतरफा जीत मिली है। भाजपा को 207 और टीएमसी को 80 सीटें मिली हैं। भाजपा को कुल 2 करोड़ 92 लाख 24 हजार 804 वोट मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस को 2 लाख 60 हजार 13 हजार 377 वोट मिले हैं।
BJP को TMC से 32 लाख 11 हजार 427 ज्यादा वोट मिले हैं। यानी 293 सीटों के हिसाब से भाजपा को हर सीट पर औसत 10,960 वोट ज्यादा मिले।
राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से कुल 91 लाख वोट कटे। यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोटरों के नाम काटे गए। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। ऐसे में TMC अब चुनाव नतीजों को कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं
- बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन पर जीत वाली 176 सीटों में भाजपा की 128 सीटें हैं। वहीं, 30 हजार से ज्यादा मार्जिन पर जीत वाली 117 सीटों में भाजपा की 79 सीटें हैं। तृणमूल की 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है।
- 2021 में भाजपा की 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में ऐसी 93.5% थीं।
- साल 2021 में 121 सीटों पर तृणमूल की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 94 पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दर्शाते हैं। इस बार भाजपा की 25 सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए या अयोग्य घोषित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है।
SC ने कहा था- वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम पर दखल नहीं देंगे
SIR को लेकर ममता सरकार की याचिका पर हाल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो कोर्ट दखल नहीं देगा। क्योंकि उन वोटों के होने या न होने से रिजल्ट पर असर नहीं पड़ता।’ कोर्ट ने कहा कि दखल तब देंगे जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे।
इस उदाहरण से आसानी से समझिए… मान लीजिए विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 95 हजार वोट तो मार्जिन हुआ 5 हजार वोट। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं तो असर नहीं। लेकिन ज्यादा हैं तो नतीजों पर असर संभव।
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