रायपुर। गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद आज प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई। स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और उत्साह के बीच शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई। शाला खुलते ही विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप का सर्वर ठप हो गया, जिसके चलते प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम के बाद शालेय शिक्षक संघ ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था और VSK ऐप को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।
शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के निजी मोबाइल में VSK ऐप डाउनलोड कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जो उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐप को डाउनलोड करने के लिए उपयोगकर्ता को डेटा, कैमरा और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से संबंधित कई तरह की अनुमतियां देनी पड़ती हैं। ऐसे में शिक्षकों की निजी जानकारी और पारिवारिक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डेटा लीक, डीप फेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग से जुड़े साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में निजी मोबाइल पर किसी सरकारी ऐप को अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराने से शिक्षकों और उनके परिवारों की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप कर ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता पड़ी भारी
वीरेंद्र दुबे ने कहा कि शिक्षा विभाग का तकनीक पर अत्यधिक भरोसा पहले ही दिन भारी पड़ गया। स्कूल खुलते ही VSK ऐप का सर्वर ठप हो गया और प्रदेशभर में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। उनका कहना है कि जब व्यवस्था तकनीकी रूप से विश्वसनीय ही नहीं है तो उसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं है।
क्या विभाग को अपने अधिकारियों पर भरोसा नहीं?
शालेय शिक्षक संघ के महासचिव धर्मेश शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या शिक्षा विभाग को अपने ही अधिकारियों और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि विभाग में सीएसी, संकुल प्राचार्य, संस्थाप्रमुख, बीआरसीसी, एबीईओ और बीईओ जैसे अधिकारी मौजूद हैं, जिनकी जिम्मेदारी विद्यालयों की निगरानी और संचालन की है। इसके बावजूद ऐप आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करना विभागीय तंत्र पर अविश्वास को दर्शाता है।
दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या से बढ़ रही परेशानी
संगठन के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रदेश के वनांचल और दूरस्थ इलाकों में आज भी कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। कई क्षेत्रों में मोबाइल टावर तक नहीं लगे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी नेटवर्क और सर्वर की समस्या बनी रहती है। ऐसे हालात में मोबाइल नेटवर्क आधारित उपस्थिति प्रणाली व्यवहारिक नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों से यह भी जानकारी मिल रही है कि निचले स्तर के अधिकारी शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। शिक्षकों के निजी मोबाइल में परिवार की तस्वीरें, बैंकिंग संबंधी जानकारियां और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं रहती हैं। ऐसे में किसी भी ऐप को दबावपूर्वक डाउनलोड कराने को संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाना चाहिए।
गैर-शैक्षणिक कार्यों के बढ़ते बोझ पर भी जताई नाराजगी
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों पर लगातार गैर-शैक्षणिक और ऑनलाइन कार्यों का दबाव बढ़ाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों का मुख्य कार्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन लगातार बढ़ते प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों के कारण उनका समय शिक्षण से हटकर अन्य गतिविधियों में खर्च हो रहा है।
संघ ने मांग की है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए, शिक्षकों के निजी मोबाइल का उपयोग बंद किया जाए और विद्यालयों में शिक्षण कार्य को प्राथमिकता दी जाए। संगठन के कई प्रांतीय पदाधिकारियों ने भी सरकार से इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।




