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आप,टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बाद अभी कई पार्टियां और टूटेंगी; मोदी सरकार को चाहिए दो तिहाई बहुमत

नई दिल्ली । 16 से 18 अप्रैल 2026 को मोदी सरकार लोकसभा में 3 विधेयक लाई। तर्क दिया कि 2029 चुनाव तक महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए ये तीनों विधेयक पारित होने जरूरी हैं। इसमें एक संविधान संशोधन विधेयक था। इसमें लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने और संविधान के आर्टिकल 81 और 82 में बदलाव करने के प्रावधान थे।

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है, यानी वोटिंग में आधे से ज्यादा सदस्य सदन में मौजूद हों और जितने सदस्य मौजूद हैं, उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसद इसके पक्ष में वोट दें।

  • मान लीजिए लोकसभा में सभी 543 सांसद मौजूद हों और बिल पर वोटिंग करें, तो बिल पास होने के लिए इसके दो-तिहाई यानी 362 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
  • अप्रैल में वोटिंग के दौरान लोकसभा में 528 सांसद मौजूद थे। इसके दो-तिहाई के हिसाब से बिल को पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे।
  • वोटिंग हुई, तो बिल के समर्थन में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े। इससे संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 54 वोटों से गिर गया।

14 जून को TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने गुमनाम सी पार्टी NCPI में विलय कर लिया। आज शिवसेना (उद्धव गुट) के 9 से 6 लोकसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी। इससे पहले 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी थी। ये सभी बागी BJP या NDA में शामिल हो रहे हैं।

अभी दोनों सदनों में मोदी सरकार का आंकड़ा कितना है?

लोकसभा में NDA के साथ 318 सांसद

  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 240 सीटों पर जीती थी। बीजेपी की अगुवाई वाले NDA गठबंधन में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 और अन्य दलों के 12 सांसद भी शामिल थे। ये आंकड़ा बहुमत से 20 ज्यादा यानी 292 होता है।
  • 14 जून को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए, जिससे लोकसभा में BJP का नंबर 292 से बढ़कर 312 हो गया।
  • महाराष्ट्र में उद्धव गुट 9 में से 6 लोकसभा सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो सकते हैं। इनके आने से लोकसभा में NDA का आंकड़ा 318 पहुंच जाएगा।

राज्यसभा में NDA के साथ 154 सांसद

  • राज्यसभा की कुल 244 सीटों में से NDA के पास शुरू में 138 सांसद थे। 24 अप्रैल को AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने BJP में विलय कर लिया। इससे BJP की अकेले की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई और NDA की कुल ताकत 145 पहुंच गई।
  • जून में हुए राज्यसभा चुनावों में BJP ने अतिरिक्त सीटें जीतीं जिससे NDA की संख्या और बढ़ी।
  • TMC के 3 राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बरैक ने भी इस्तीफा दे दिया है। पश्चिम बंगाल की ये सीटें बीजेपी जीत सकती है, ऐसे में राज्यसभा में नंबर बढ़कर 154 हो सकता है।

संसद में दो-तिहाई बहुमत से कितना पीछे है सरकार, बाकी कैसे आएंगे?

फिलहाल सरकार लोकसभा में दो-तिहाई के आंकड़े से 44 सीट और राज्यसभा में 10 सीट दूर है। ये कमी कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों से पूरी हो सकती है।

1. लोकसभा में DMK और JMM के सांसदों पर दांव

  • लोकसभा में NDA की नजर दो पार्टियों पर रहेगी। पहली- तमिलनाडु के पूर्व सीएम MK स्टालिन की DMK और दूसरी हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM पर। लोकसभा में फिलहाल DMK के 22 और JMM के 3 सांसद हैं।
  • JMM अभी INDIA ब्लॉक का हिस्सा है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, JMM सांसद भी BJP के संपर्क में हैं। हालांकि DMK से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने कांग्रेस से दूरी जरूर बनाई है, लेकिन वह BJP का समर्थन नहीं करेगी।
  • अगर DMK औैर JMM के सांसद सरकार का समर्थन कर दें, तो NDA का आंकड़ा 343 तक पहुंच जाएगा, जो दो-तिहाई बहुमत से 19 सीट कम होगा।
  • NDA को विपक्षी सांसदों की गैरमौजूदगी से भी फायदा हो सकता है। अप्रैल की वोटिंग में 12 सांसद अनुपस्थित थे।
  • अगर अगली वोटिंग में अनुपस्थित सांसदों की संख्या बढ़ती है, तो दो-तिहाई का आंकड़ा नीचे आ जाएगा और सरकार को जरूरी समर्थन जुटाने में आसानी होगी।

2. राज्यसभा में YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल की जरूरत

  • राज्यसभा में बीजेपी की नजर YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल यानी BJD जैसी छोटी पार्टियों पर रहेगी जो न तो NDA में हैं और न INDIA ब्लॉक में।
  • YSR कांग्रेस के 4 और BJD के 5 हैं। अगर इनमें से कुछ सांसद NDA को समर्थन दे दें, तो सरकार 10 सीटों का फासला पाटने के करीब पहुंच सकती है।
  • इसमें एक दिक्कत ये है कि नवंबर में उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सांसद रिटायर हो रहे हैं। विधानसभा में बेहतर स्थिति के चलते समाजवादी पार्टी उपचुनाव में कुछ ज्यादा सीटें जीत सकती है, इससे NDA का गणित बिगड़ सकता है।

BJP परिसीमन बिल को पास कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। बंगाल और महाराष्ट्र में जो स्थितियां बनीं, वो BJP की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है। आगे तमिलनाडु में DMK, बिहार में RJD और यूपी में सपा या बसपा के सांसदों पर भी दबाव बनाकर उन्हें तोड़ने की कोशिश हो सकती है।

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