तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताई। CENTCOM के मुताबिक ये हमले होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी ठिकानों पर किए गए। यह कार्रवाई ‘एम/टी किकु’ नाम के तेल टैंकर पर हुए ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई है।
रॉयटर्स के मुताबिक होर्मुज से गुजर रहे एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन वह आगे बढ़ रहा है। अमेरिका ने ईरान पर हमला करने का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। यह कार्रवाई अमेरिका की ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई।
बहरीन पर ड्रोन हमले की ओमान ने निंदा की
ओमान ने शनिवार को बहरीन पर हुए ईरानी ड्रोन हमले की निंदा की है। इसके साथ ही उसने बहरीन के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है। इससे पहले कतर, कुवैत और यूएई भी इस हमले की निंदा कर चुके हैं।
ओमान सरकार ने बयान जारी कर कहा कि वह बहरीन की सुरक्षा, उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए उसके साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है। साथ ही क्षेत्र की शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली हर कार्रवाई को पूरी तरह खारिज करता है।
अमेरिका का दावा- ईरानी हमलों में सैनिकों को नुकसान नहीं
एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान ने बहरीन और कुवैत समेत पड़ोसी देशों की ओर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। हालांकि, फिलहाल अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। साथ ही, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
IRGC की चेतावनी- दुश्मन की हर कार्रवाई का करारा जवाब देंगे
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका के साथ हालिया जवाबी हमलों के बाद कहा है कि भविष्य में दुश्मन की किसी भी कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा।
IRGC ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के अंतरिम समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही का नियंत्रण तेहरान के पास है। अब से नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ पहले से ज्यादा सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संगठन ने यह भी कहा कि युद्धविराम का उल्लंघन दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम (MoU) के खिलाफ है और अगर ऐसा जारी रहा तो समझौते से जुड़ी पूरी प्रक्रिया रुक सकती है।




