रायपुर। राज्य के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को जमानत मिल गई। शीर्ष अदालत से राहत मिलने के बाद उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। यह राहत जिला अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान मिली है।
राम अवतार जग्गी हत्याकांड में वर्ष 2007 में रायपुर की जिला अदालत ने चिमन सिंह, याह्या ढेबर, एएस गिल और अन्य पुलिस अधिकारी व कुल 28 सह-आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को निचली अदालत ने बरी कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें भी दोषी ठहराया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट से रोक लगी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी अपील
इस फैसले को चुनौती देते हुए चिमन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने चिमन सिंह की जमानत याचिका स्वीकार कर उसे अंतरिम राहत प्रदान की।
चार जून 2003 को हुई थी हत्या
बता दे कि चार जून 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की मौदहापारा पुलिस थाने के समीप दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह मामला प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल था। अब सुप्रीम कोर्ट से चिमन सिंह को जमानत मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।




