इस्लामाबाद। पाकिस्तान अगले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की महत्वपूर्ण शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करना है। इस युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
इस्लामाबाद के अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भारी इंतजाम किए जा रहे हैं। दूसरे प्रांतों से हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों को बुलाया गया है। पहले दौर की बातचीत में 10,000 से ज्यादा जवान तैनात रहे थे। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अगले हफ्ते यातायात पर कड़ी पाबंदियां रहेंगी। जरूरत पड़ने पर स्कूल और बाजार भी बंद किए जा सकते हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति की वजह से पिछला समझौता नहीं हो पाया। दूसरी तरफ, ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि उनकी टीम ने आगे की पहल की, लेकिन दूसरी तरफ की पार्टी इस बातचीत के दौर में ईरानी डेलीगेशन का भरोसा जीतने में नाकाम रही।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस्लामाबाद में अंतिम समझौता होता है, तो वह वहां जा सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान चल रही बातचीत की लगभग सभी शर्तों को मान चुका है। इस दौरान ट्रंप ने उन्होंने पाकिस्तानी नेतृत्व की भी तारीफ की। यह पूरा विवाद 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ था।



