अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को 2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इस मामले में 56 लोग मारे गए थे और 246 घायल हुए थे। उच्च न्यायालय ने 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा में राहत देने से इनकार कर दिया।
26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद शहर में कई ब्लास्ट हुए थे। इसके दो दिन बाद सूरत में भी बम मिले थे। शहर की क्राइम ब्रांच की जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया था। कुल 78 लोगों पर मुकदमा चलाया गया।
फरवरी 2022 में, एक विशेष अदालत ने 49 लोगों को दोषी पाया था। वहीं, 28 अन्य को बरी कर दिया गया था। बरी किए गए लोगों में मुबीन शेख और मंसूर पीरभॉय शामिल थे। इन पर साजिश रचने और धमकी भरे ईमेल भेजने का आरोप था। उन्होंने आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। ट्रायल कोर्ट ने एक अप्रूवर को माफ कर दिया था। चार अन्य अप्रूवर, जिन्होंने बाद में अपने बयान वापस ले लिए थे, उन्हें दोषी ठहराया गया।
18 पहले हुए हमलों का मकसद क्या था?
2008 के ब्लास्ट अस्पतालों पर पहला हमला थे। आरोपियों द्वारा भेजे गए ईमेल में दावा किया गया था कि यह 2002 के गोधरा-बाद के गुजरात हिंसा का बदला था।




