कोरापुट । पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन को लेकर बलदा की पहाड़ियों में मंगलवार को तनाव फैल गया। नंदपुर ब्लॉक के बलदा पहाड़ी क्षेत्र में कथित ड्रोन सर्वे का ग्रामीणों ने जबरदस्त विरोध किया।
सैकड़ों ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर सर्वे टीम को घेर लिया और अदाणी समूह के प्रतिनिधि दिलीप परिच्छा व प्रमोद हियाल समेत कर्मचारियों को रोककर बंधक बना लिया।
सूचना पर पाडुआ पुलिस पहुंची और सभी को मुक्त कराया। ग्रामीणों द्वारा रोके गए ड्रोन और वाहनों को पुलिस ने जब्त कर लिया। इसके बाद सर्वे कार्य रोक दिया गया।
पहाड़ियों का ड्रोन सर्वे अवैध
बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति ने पाडुआ थाने में शिकायत देकर सर्वे को कथित रूप से अवैध बताया है। थाना प्रभारी टूना पिडिका ने शिकायत प्राप्त की है।
समिति अध्यक्ष अजय मुदुली और बिजय कुमार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने चिलम, कंतासारू, खड़ापुट, कंधागुड़ा, तैनतार और बलदा गांवों से पहुंचकर सर्वे का विरोध किया।
ग्रामीणों का सीधा सवाल था कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में पहाड़ियों का ड्रोन सर्वे किसके आदेश पर और किस उद्देश्य से किया जा रहा है? पेसा कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को स्थानीय संसाधनों और समुदाय के हितों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
प्रस्तावित खनन गतिविधियों के बीच ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि सर्वे से पहले ग्रामसभा को क्या जानकारी दी गई और उसकी भूमिका क्या रही। बलदा, भेजा, बादेल, अटांडा और कुलबीर पंचायतों के ग्रामीण प्रस्तावित खनन के लिए आयोजित ग्रामसभा और जनसुनवाई का विरोध कर रहे हैं।
पहले भी हो चुका है विरोध
समिति का आरोप है कि सीएसआर गतिविधियों के नाम पर कंपनी के अधिकारी लगातार गांवों में पहुंच रहे हैं और ग्रामीणों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ दिन पहले बलदा में अदाणी की मोबाइल स्वास्थ्य सेवा के वाहन का भी विरोध हुआ था।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, बलदा पहाड़ियों और गुफाओं को वर्ष 2008 में पर्यावरण पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता मिली थी। बाद में पहाड़ी को खनन के लिए चिह्नित किया गया और नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से अदाणी समूह को खनन अधिकार मिले।
अब विवाद का केंद्र सिर्फ ड्रोन सर्वे नहीं है। सवाल यह है कि आदिवासी क्षेत्र की जमीन और पहाड़ियों के भविष्य का फैसला किस प्रक्रिया से होगा, कंपनी के सर्वे से या ग्रामसभा की भागीदारी से?
ग्रामीणों के उठाए प्रमुख सवाल
●सर्वे की अनुमति किस विभाग ने दी?
●ग्रामसभा को पूर्व सूचना दी गई थी या नहीं?
●ड्रोन सर्वे का वास्तविक उद्देश्य क्या था?
●पांचवीं अनुसूची और पेसा के प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं?
●प्रस्तावित खनन में आदिवासी भूमि व सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा कैसे होगी?




