बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दो उज्बेकिस्तान की महिला नागरिकों को उनके देश वापस भेजने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास समेत सभी पक्ष डिपोर्टेशन (प्रत्यावर्तन) के पक्ष में हैं, इसलिए याचिका में अब विचारणीय कुछ शेष नहीं रह गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों महिलाओं को उज्बेकिस्तान भेजने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। मामले में उज्बेकिस्तान दूतावास ने भी अदालत से शीघ्र डिपोर्टेशन के लिए आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया था।
सभी पक्षों की सहमति के बाद कोर्ट ने दिया आदेश
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों विदेशी महिलाओं को उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई की जा सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब सभी संबंधित पक्ष डिपोर्टेशन के पक्ष में हैं, तब याचिका लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।
होटल में अवैध रूप से रह रही थीं दोनों महिलाएं
जानकारी के अनुसार रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक होटल में कार्रवाई करते हुए दो उज्बेकिस्तान की महिलाओं को हिरासत में लिया था। जांच में उनके भारत में रहने संबंधी दस्तावेजों और वैधता को लेकर सवाल सामने आए थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
रायपुर जेल में बंद हैं 10 विदेशी नागरिक
सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में रायपुर जेल में दो उज्बेकिस्तान की महिलाओं समेत कुल 10 विदेशी नागरिक बंद हैं। इनमें विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनके खिलाफ वीजा नियमों और विदेशी नागरिक अधिनियम से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया होगी तेज
हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित एजेंसियां अब यात्रा दस्तावेज, पहचान सत्यापन और दूतावास से समन्वय जैसी औपचारिकताएं पूरी करेंगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों महिलाओं को उनके देश उज्बेकिस्तान भेजा जाएगा।
माना जा रहा है कि अदालत के इस आदेश के बाद अन्य विदेशी नागरिकों के मामलों में भी डिपोर्टेशन प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तेजी आ सकती है।




