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छत्तीसगढ़: बाजार में पॉलिथीन की बिक्री पर हाईकोर्ट नाराज, कहा-बैन के बाद भी मार्केट में कैसे बिक रही, चीफ-सेक्रेटरी से शपथपत्र के साथ मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक और पॉलिथीन के उपयोग, बिक्री, परिवहन और भंडारण पर प्रतिबंध के बावजूद इसके अनियंत्रित इस्तेमाल पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रदेश में प्लास्टिक रेगुलेशन एक्ट 2020 और नियम 2023”लागू होने के बाद भी धड़ल्ले से प्रतिबंधित सामग्री कैसे बिक रही है। इस मामले में मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के लिए कहा गया है। केस की अगली सुनवाई 13 मई को होगी।

दरअसल रायपुर के रहने वाले नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें बताया है कि राज्य शासन ने प्रदेश में प्लास्टिक कैरी बैग, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, चम्मच, स्ट्रॉ, थर्मोकॉल की सजावटी सामग्री, 200 मिलीलीटर से कम की पीईटी बोतलों और विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाले फ्लेक्स-बैनर पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। हालांकि दवाइयों की पैकेजिंग और 50 माइक्रोन से अधिक के दूध के पैकेट जैसी अनिवार्य वस्तुओं को नियमों के तहत कुछ छूट दी गई है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल उदासीन

याचिका में बताया गया है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवास और पर्यावरण विभाग ने नवंबर 2025 में ही छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को एक उच्च स्तरीय समिति का प्रारूप तैयार करने का आदेश दिया था, लेकिन मंडल की ओर से अब तक कोई ठोस प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है।

छोटे दुकानदारों के बजाए चेन को ध्वस्त की जाए

इसके साथ ही कहा कि प्लास्टिक के इस अवैध नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को ध्वस्त करना होगा। इसके लिए राज्य की सीमाओं पर विशेष जांच दल गठित कर ट्रकों की चेकिंग करने, प्लास्टिक बनाने वाली संदिग्ध फैक्ट्रियों के बिजली खपत के पैटर्न की निगरानी करने और उनके जीएसटी विवरणों की जांच करने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि होटलों और ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं की ओर से उपयोग की जा रही पैकेजिंग के स्रोतों की भी पहचान की जानी चाहिए, ताकि नियमों में दी गई छूट का दुरुपयोग रुक सके।

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