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छत्तीसगढ़: जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने लगे हैं अधिकारी, बृजमोहन के बाद अब विजय बघेल ने की विशेषाधिकार हनन की शिकायत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्य के अधिकारी अब जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने लगे हैं? हाल ही में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से सांसद विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डीएस राजपूत के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।

सांसद का आरोप है कि ये अधिकारी न केवल उनके फोन का जवाब नहीं देते थे, बल्कि जनहित से जुड़े मामलों में अपेक्षित सहयोग और जानकारी देने से भी कतराते थे। इस शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब कर लिया है।

प्रशासनिक जवाबदेही के बीच बढ़ती खाई

लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह माना जाता है कि शासन-प्रशासन और जनता के बीच जनप्रतिनिधि एक मजबूत सेतु का काम करते हैं। सड़क, पेयजल, सफाई और बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर जब आम जनता अपने सांसद के पास पहुंचती है, तो जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी होती है कि वे संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर उनका समाधान कराएं। लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही फोन उठाने या संवाद करने से बचने लगें, तो जनता और जनप्रतिनिधि दोनों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। इसी संवादहीनता के चलते जनता में असंतोष बढ़ता है और विकास कार्य भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

बृजमोहन अग्रवाल प्रकरण से गरमाया मामला

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच ठनने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के साथ भी एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच फोन पर हुई बातचीत और कथित रूप से रूखे व्यवहार को लेकर बड़ा विवाद सामने आ चुका है। इस तरह की लगातार सामने आ रही घटनाओं से यह साफ जाहिर होता है कि नौकरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी संवाद का स्तर लगातार गिर रहा है।

टकराव की ओर बढ़ती अफसरशाही

जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते अधिकारियों की इस कार्यशैली पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा टकराव का रूप ले सकता है। बहरहाल, लोकसभा सचिवालय द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

जनता का भरोसा है, निराकरण कराने करते हैं फोन

दुर्ग लोकसभा क्षेत्र की जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मुझ पर भरोसा करती है। मेरी जिम्मेदारी है कि संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर नागरिकों की समस्याओं का समय पर निराकरण कराऊं। लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराते, तब जनहित के कार्य प्रभावित होते हैं। यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के अधिकारों से जुड़ा विषय है। इसी कारण मुझे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज करानी पड़ी।

– विजय बघेल, सांसद दुर्ग लोकसभा

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