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डॉलर के मुकाबले ही नहीं, पाकिस्तान और बांग्लादेश की करेंसी के सामने भी खस्ताहाल हुआ भारतीय रुपया

नई दिल्ली । भारतीय रुपया अब सिर्फ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ही नहीं गिर रहा है, बल्कि पड़ोसी देशों की मुद्राओं के सामने भी काफी कमजोर हो गया है. पिछले एक साल में भारतीय रुपए ने पाकिस्तानी रुपए और बांग्लादेशी टके के मुकाबले भी बड़ी गिरावट दर्ज की है. इससे पता चलता है कि रुपए में आ रही गिरावट का कारण सिर्फ डॉलर की मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संरचनात्मक कमजोरी है.

पाकिस्तान और बांग्लादेश की करेंसी के सामने भारतीय रुपया

मई 2025 में एक भारतीय रुपया 3.2913 पाकिस्तानी रुपए के बराबर था, जो मई 2026 में घटकर मात्र 2.9010 पाकिस्तानी रुपए रह गया है. यानी एक साल में भारतीय रुपए की ताकत में पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले करीब 11.86 फीसदी की गिरावट आई है. इसमें सिर्फ 2026 में ही 6.8 फीसदी की कमी आई है. इसी तरह बांग्लादेशी टके के मुकाबले भी भारतीय रुपया पिछले एक साल में करीब 10 फीसदी कमजोर हुआ है. जहां एक साल पहले एक रुपए में 1.42 टका मिलते थे, वहीं अब यह घटकर 1.28 टका रह गया है.

आज के कारोबार में यहां बना नया रिकॉर्ड लो

सीसीआईएल की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में आज रुपए ने कारोबार की शुरुआत ही 19 पैसे की गिरावट में 96.89 के नए निचले स्तर पर की. कुछ ही देर में इसने और नीचे का स्तर बना दिया. सुबह के सेशन में कुछ मिनटों के कारोबार में ही रुपया एक समय 25 पैसे से अधिक की गिरावट लेकर 96.9575 का रिकॉर्ड निचला स्तर छू चुका था. यही अब डॉलर के सामने भारतीय रुपए का नया ऐतिहासिक निचला स्तर है. दोपहर के 1:15 बजे यह थोड़ा संभलकर 96.8775 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. इससे पहले मंगलवार को रुपए ने 96.70 का नया रिकॉर्ड लो बनाया था. सप्ताह के दूसरे दिन डॉलर के सामने रुपए में 50 पैसे की गिरावट आई थी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट बता रही है कि आज लगातार नौवां दिन है, जब रुपया नया रिकॉर्ड लो बना रहा है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक डॉलर के सामने रुपया करीब छह फीसदी कमजोर हो चुका है.

इन कारणों से कमजोर हो रहा है रुपया

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची तेल कीमतें, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी रुपए को कमजोर करने के मुख्य कारण हैं. भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और रुपए पर दबाव पड़ता है. साथ ही वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं जैसे भारत में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी कम हो गया है.

आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा अब सीधा असर

रुपए की यह गिरावट सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी असर डाल रही है. विदेश में पढ़ाई, विदेश यात्रा, आयातित सामान और अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा हो गया है. अर्थशास्त्रियों द्वारा अब चेतावनी दी जा रही है कि अगर रुपया लंबे समय तक कमजोर रहा तो भारत का भुगतान संतुलन घाटा और बढ़ सकता है, क्योंकि आयात का खर्च निर्यात और पूंजी प्रवाह से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है.

फाइनेंशियल टाइम्स ने हाल ही में एक रिपोर्ट में रुपए की कमजोरी के आम भारतीयों पर पड़ने वाले असर की चर्चा की. रिपोर्ट में कहा गया कि रुपया कई तिमाहियों से प्रमुख मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बना हुआ है, जिससे विदेशी शिक्षा, व्यापार और पर्यटन महंगा हो गया है. हाल ही में विदेश यात्रा पर टैक्स लगाने की अफवाह से सोशल मीडिया पर काफी गुस्सा देखा गया, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसे पूरी तरह झूठ बताते हुए खारिज किया था.

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