नई दिल्ली। पश्चिम में राजस्थान से मानसून की वापसी के साथ ही पूर्व में बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसमी सिस्टम अगले कुछ घंटों में ताकतवर हो सकता है। समुद्र में बड़ी हलचल दिखाई देने लगी है। मंगलवार तक इसके गहरे डिप्रेशन में बदलने और आगे चलकर चक्रवाती तूफान का रूप लेने का खतरा है।
चक्रवात बनने की स्थिति में बांग्लादेश ने इसका नाम ‘अर्नब’ दिया है, जिसका असर आठ राज्यों में देखा जा सकेगा। मौसम विज्ञानियों ने अगले 24 घंटे इस सिस्टम की दिशा और ताकत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा को रहना होगा अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार यह सिस्टम फिलहाल पश्चिम-उत्तर की ओर बढ़ रहा है और 23 सितंबर की सुबह के आसपास आंध्र प्रदेश और ओडिशा तट के पास पहुंच सकता है। इस दौरान तट के पास 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। हवा की गति करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। समुद्र की स्थिति बहुत खराब हो सकती है। हालांकि अभी इसे तूफान कहना जल्दबाजी होगी। इसके लिए सिस्टम का और मजबूत होना जरूरी है।
दो दिनों में अधिक स्पष्ट होगी वास्तविक ताकत और दिशा
स्काईमेट के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान और वातावरण में नमी इस सिस्टम को मजबूत होने के लिए अनुकूल हालात पैदा कर रही रही हैं। इसलिए इसके गहरे डिप्रेशन से आगे बढ़ने की संभावना पर नजर है। हालांकि मौसम विज्ञान में केवल हवा की गति ही नहीं, बल्कि सिस्टम की संरचना और उसके संगठन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अगले एक-दो दिनों में इसकी वास्तविक ताकत और दिशा अधिक स्पष्ट होगी।
कहां-कहां दिखेगा असर?
इस मौसमी तंत्र के आगे बढ़ने की स्थिति में बारिश का क्षेत्र ओडिशा और आंध्र प्रदेश से आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, विदर्भ और मध्य भारत तक फैल सकता है। बिहार, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी असर दिख सकता है। झारखंड में 22 सितंबर से बारिश और तेज हवाओं का असर बढ़ सकता है।
गरज-चमक के साथ बारिश
बिहार में 24 से 26 सितंबर के दौरान बारिश बढ़ने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर के करीब गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। यानी बंगाल की खाड़ी में बन रहा यह सिस्टम पूर्वी भारत से होते हुए उत्तर प्रदेश तक मौसम को प्रभावित कर सकता है।
फसलों को हो सकता है भारी नुकसान
तेज हवा और लगातार बारिश का असर खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर पड़ना तय है। इस समय धान समेत खरीफ फसलों के मजबूत होने का समय है। तेज हवा से धान की फसल खेत में गिर सकती है। इससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ कटाई में भी परेशानी आती है। सोयाबीन, मक्का और दलहन जैसी फसलें भी तबाह हो सकती हैं।




