नई दिल्ली। भारत में जल्द ही ऐसी कारें सड़कों पर दौड़ती दिखेंगी, जो न तो पेट्रोल-डीजल और CNG से चलेंगी और न ही उनमें बैटरी होगी। केंद्र सरकार ने 100% एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही तकनीक
ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इन विशेष वाहनों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे एक ही फ्यूल टैंक में पेट्रोल और एथनॉल के विभिन्न अनुपातों पर आसानी से चल सकें। वाहन के सर्टिफिकेशन के आधार पर यह मिश्रण E85 या 100 प्रतिशत एथनॉल (E100) तक हो सकता है।
अधिकारियों ने कहा कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल का फॉसिल कार्बन फुटप्रिंट कम होता है। एथनॉल के अधिक मिश्रण का उपयोग करने से वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कुछ हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, एथनॉल का अधिक उपयोग कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता को भी कम करेगा।




