छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ : नर्सिंग प्रवेश में फर्जीवाड़ा, एक छात्र का नाम दो से ज्यादा कॉलेजों में, पहली जांच में ही ऐसे 70 छात्र मिले,सबको भेजा नोटिस

रायपुर I राज्य सरकार ने नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए नंबरों की बाध्यता खत्म कर दी, लेकिन अब इस पर फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की प्रारंभिक जांच में ही इस बात का खुलासा हो गया है कि एक छात्र को दो से ज्यादा नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन दे दिया गया है।

अभी तक ऐसे 70 छात्रों के नाम सामने आ गए हैं। गड़बड़ी करने वाले सभी कॉलेजों को नोटिस भी भेज दी गई है। जीरो परसेंटाइल में एडमिशन देने के आदेश के बाद से ही खासतौर पर निजी नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। क्योंकि एडमिशन 31 दिसंबर तक ही हो सकते हैं।

काउंसिलिंग के लिए समय कम होने की वजह से कॉलेज वाले अपनी मनमानी से छात्रों को प्रवेश दे रहे हैं। डीएमई ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने सभी कॉलेजों को नोटिस जारी कर दी है।

कॉलेजों को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यह काम गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। इससे छात्रों का भविष्य भी खराब हो सकता है। ऐसे में एडमिशन में विशेष सावधानी बरतें। कहीं भी गड़बड़ी मिली तो कॉलेज प्रबंधन पर कार्रवाई तय है।

सूची मंगाई तो खुला कॉलेजों का गोलमाल

बीएससी नर्सिंग, एमएससी, पोस्ट बेसिक बीएससी व जीएनएम में तीन राउंड के एडमिशन 31 अक्टूबर तक ही हो गए थे। अभी नंबरों की बाध्यता खत्म होने से जीरो परसेंटाइल से एडमिशन हो रहे हैं। डीएमई कार्यालय ने सभी कॉलेजों से एडमिशन लेने वालों की सूची मंगाई।

इसकी बारीकी से जांच करने के बाद ही पता चला कि एक छात्र के नाम कई कॉलेजों में हैं। कई छात्र ऐसे हैं जिनका नाम दो से भी ज्यादा कॉलेजों में है। इसके बाद ही नोटिस जारी करने के साथ ही अलर्ट भी जारी किया गया। अभी तेजी से नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश हो रहे हैं। इसलिए डीएमई ने 31 अक्टूबर के बाद फिर से सूची मंगाई है। इस लिस्ट की भी जांच होगी।

गलती पर कॉलेजों के खिलाफ करेंगे कार्रवाई

डीएमई कार्यालय ने कहा है कि दोबारा एक छात्र का नाम एक से ज्यादा कॉलेजों की प्रवेश सूची में मिला तो कॉलेजों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह गलती कॉलेज की ही मानी जाएगी। इसके लिए छात्र जिम्मेदार नहीं होंगे।

इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अनुसार नर्सिंग कोर्सों में 31 दिसंबर तक ही एडमिशन दिया जा सकेगा। इसके बाद खाली रहने वाली सीटें लैप्स हो जाएंगी। इसलिए हर कॉलेज की कोशिश है कि वे अपने कॉलेजों में ज्यादा से ज्यादा एडमिशन दे। सीटें ज्यादा खाली रहने पर कॉलेज चलाने में भी कई तरह की परेशानी होती है।

कॉलेजों ने दिया जवाब- छात्रों ने ही छोड़ीं सीटें

डीएमई ने कॉलेज प्रबंधनों से जब छात्रों को एक से ज्यादा कॉलेजों में एडमिशन देने की जानकारी मांगी तो ज्यादातर ने कहा कि जिन छात्रों के नाम दूसरे कॉलेजों में वे सीट छोड़कर जा चुके हैं। इस पर अधिकारियों ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो प्रवेशित सूची में उनके नाम क्यों नहीं हटाए गए। डीएमई दफ्तर को ऐसे छात्रों के नाम क्यों भेजे गए।

प्रवेश लेने और सीट छोड़ने वाले छात्रों के नाम एक साथ क्यों रखे गए। इस पर कॉलेज संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। फिलहाल ऐसे कॉलेजों को चेतावनी ही दी गई है। लेकिन यह भी कहा गया है कि अब गड़बड़ी हुई तो कार्रवाई भी तय है।