छत्तीसगढ़

केंद्र सरकार 12 करोड़ बच्‍चों के लिए मिड-डे मील पर सालाना 20,000 करोड़ रुपये से अधिक करती है खर्च

नई दिल्ली। मिड-डे मील योजना के नाम से मशहूर पीएम पोषण योजना पर केंद्र सरकार हर साल 20,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती है। देश भर के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 12 करोड़ से अधिक बच्चे इस योजना का लाभ उठाते हैं।

पीएम पोषणा योजना को केंद्र सरकार करती है स्पांसर

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना को केंद्र सरकार स्पांसर करती है, जिसमें सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त सकूलों के कक्षा बाल वाटिका और एक से लेकर आठ तक के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इसमें शामिल किया गया है। पांच साल से लेकर 11 साल तक के लगभग 12 करोड़ बच्चे इस योजना से लाभान्वित होते हैं, जिसमें बाल वाटिका के 22.6 लाख, 7.2 करोड़ प्राथमिक और 4.6 करोड़ उच्च प्राथमिक स्कूल के बच्चे शामिल हैं।

गरीब बच्चों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का उदेश्य भारत में अधिकांश बच्चों के लिए दो प्रमुख समस्याओं का समाधान करना है। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बाल वाटिका और एक से लेकर आठवीं तक के पढ़ने वाले बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार करना तथा वंचित वर्गों के गरीब बच्चों को प्रोत्साहित कर नियमित रूप से स्कूल जाने और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

एक साल में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का होता है खर्च

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत एक साल में 9,500 करोड़ रुपये की खाद्य सब्सिडी सहित 20,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के कारण स्कूलों के बंद होने के दौरान सभी नामांकित बच्चों को खाद्य सुरक्षा भत्ता भी प्रदान किया गया। सूत्रों ने आगे बताया कि इस योजना के तहत 2022-23 के लिए 31 लाख मीट्रिक खाद्यान्न वितरित किए गए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत गर्म पका हुआ भोजन बच्चों का अधिकार है।