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वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष का आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, 6 मेट्रो स्टेशन बंद; CJI ने किया राहुल-खड़गे से मिलने से इनकार

नई दिल्ली। वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक में शामिल अन्य विपक्षी पार्टियां आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगी। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली-मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है। विपक्षी नेता दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन पर जुटेंगे।

नेता विपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था, ताकि उन्हें ज्ञापन सौंप सकें। हालांकि, CJI ने मिलने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

CJI की तरफ से मुलाकात की मांग खारिज होने पर कांग्रेस ने कहा- उनके फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहा है। साथ ही 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और उनके मारपीट का विरोध कर रहा है।

विपक्ष ने 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपा था ज्ञापन

इससे पहले शुक्रवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं रखी थीं।

राहुल-प्रियंका 4 दिन में 3 बार हिरासत में लिए गए

विपक्षी सांसदों ने 6, 7, 8 और 9 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में प्रदर्शन किया था। इस दौरान तीन बार राहुल और प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।

मंडी हाउस, राजीव चौक सहित 6 मेट्रो स्टेशन बंद

दिल्ली के जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक मेट्रो स्टेशन के एंट्री और एग्जिट गेट सोमवार शाम 4 बजे तक बंद रहेंगे।

2023 के कानून पर मल्लिकार्जुन खरगे का हमला

बेंगलुरु में दिए बयान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2023 में बनाए गए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को ऐसी कानूनी सुरक्षा दी गई है, जो राष्ट्रपति या देश के मुख्य न्यायाधीश को भी हासिल नहीं है।

खरगे ने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को जीवनभर के लिए जवाबदेही से मुक्त कर दिया गया है। उनके अनुसार, यह जनता के वोट छीनने और लोकतंत्र को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है, जिसके खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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