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NPCI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- ‘UPI MDR चार्ज ग्राहकों पर नहीं डाल सकते व्यापारी’

नई दिल्ली। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि UPI के संशोधित प्राइसिंग फ्रेमवर्क के तहत, व्यापारी ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) चार्ज का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को केंद्र सरकार और NPCI समेत अन्य पक्षों से एक याचिका पर जवाब मांगा था। इस याचिका में 2000 रुपये से अधिक के कुछ खास UPI ‘पर्सन-टू-मर्चेंट’ (P2M) ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

हालांकि, जब याचिकाकर्ता के वकील ने मामले पर विचार होने तक इस फैसले पर स्टे लगाने की मांग की, तो कोर्ट ने संशोधित फ्रेमवर्क पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

व्यापारी UPI MDR चार्ज ग्राहकों पर नहीं डाल सकते

3 नवंबर को दाखिल एक हलफनामे में, NPCI ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर कोई ‘प्लेटफॉर्म फीस’ या अन्य शुल्क नहीं लगा सकते।

याचिका में ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ की धारा 10A में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई थी। यह संशोधन ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट’ के जरिए लाया गया था। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय की अधिसूचना और सितंबर में घोषित NPCI के संशोधित MDR फ्रेमवर्क को भी चुनौती दी गई थी।

NPCI ने कहा, ‘MDR चार्ज केवल उन P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन के एक बहुत छोटे हिस्से (लगभग 0.4%) पर लागू होता है, जो 2000 रुपये से अधिक के होते हैं।

चूंकि यह चार्ज बहुत सीमित मामलों में और एक तय सीमा से अधिक राशि के ट्रांजैक्शन पर ही लगता है, इसलिए व्यापारियों के पास अपने सभी ग्राहकों के लिए कीमतें बदलने का कोई खास कारण नहीं बनता। इसलिए, यह आशंका कि MDR फ्रेमवर्क की वजह से चुपचाप कीमतें बढ़ा दी जाएंगी, पूरी तरह गलत है।’

2000 से अधिक P2M लेनदेन पर ही MDR लागू

संशोधित फ्रेमवर्क का बचाव करते हुए, कॉरपोरेशन ने कहा कि MDR चार्ज को ग्राहकों पर डालने से रोकना केवल एक नीतिगत आश्वासन नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य निर्देश है, जिसे कानूनी अनुबंधों के जरिए लागू किया गया है।

इसमें कहा गया है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर बैंकों, पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स (PSPs) और थर्ड पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स (TPAPs) के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें उनकी UPI मेंबरशिप और सुविधाओं को खत्म किया जाना भी शामिल है।

कॉर्पोरेशन ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया कि संशोधित शुल्क से व्यापारियों की कीमतें बढ़ने के कारण ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। इसमें बताया गया है कि नए ढांचे के तहत, 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत तक का MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू होगा।

P2P ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे

NPCI ने कहा कि तय सीमा से कम के ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे और ‘जीरो-MDR’ ढांचे के दायरे में आने वाले छोटे व्यापारियों को भी इससे छूट मिलती रहेगी।

हलफनामे में कहा गया है कि चूंकि यह शुल्क सीमित मामलों में ही लागू होगा, इसलिए व्यापारियों के पास अपने सभी ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ाने की गुंजाइश बहुत कम होगी। NPCI ने आगे कहा कि P2P ट्रांसफर और P2PM कैटेगरी के तहत छोटे व्यापारियों से जुड़े ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा।

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