
Screenshot
धमतरी। जिले में रूद्री नदी में स्विमिंग के लिए गए पिता को उसके बेटे और भतीजे ने बहादुरी दिखाते हुए बचा लिया। नदी में स्विमिंग के समय पिता अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
बच्चों को तैरना नहीं आता था। फिर भी उन्होंने अपने पिता की जान बचाने का साहस दिखाया। बेटे और भतीजे ने मिलकर डूबते पिता को बाहर निकाला। उन्होंने तुरंत पिता को सीपीआर भी देकर उन्हें होश में ले आए।
दरअसल, आमा तालाब के रहने वाले संतोष देवांगन (46) शुक्रवार सुबह आठ बजे अपने बेटे आशु (10) और भतीजे मेहुल (11) को स्विमिंग सिखाने रूद्री नदी गए थे। नदी में स्विमिंग करते समय बेटे आशु का पैर फिसल गया। तभी संतोष ने बेटे को बचाने तुरंत वहां आ गए।
संतोष ने पहले बेटे और भतीजे को किनारे की ओर धक्का देकर उन्हें सुरक्षित किया। इसी बीच वे खुद गहरे पानी में चले गए और खुद पानी में डूबने लगे। संतोष गहरे में पानी गोते खाने लगे।
सीपीआर देकर पिता को होश में ले आए बच्चे
पिता को डूबता देख बेटे आशु और भतीजे मेहुल हड़बड़ा गए। दोनों को तैरना नहीं आता था, ऐसे में उन्हें कुछ समझ नहीं रहा था वो क्या करें। इस पर दोनों बच्चों ने हिम्मत दिखाई और गहरे पानी में उतरकर उन्हें बाहर खींच लिया। गहरे पानी में डूबने की वजह से संतोष बेहोश हो चुके थे। बच्चों ने सीपीआर देकर उन्हें होश में ले आए।
दूसरे व्यक्ति के मोबाइल से घरवालों को दी जानकारी
भतीजा वहां एक व्यक्ति से मोबाइल मांगा और फिर घरवालों को घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद घर वाले मौके पर पहुंचे। वहीं संतोष को 108 एम्बुलेंस से उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां वे अब आईसीयू में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है।

बेटे आशु ने बताया कि वे अपने पिता और भाई के साथ सुबह रूद्री नदी में स्विमिंग सीखने रूद्री नदी गया था। तैरते वक्त मेरा पैर फिसल गया। तभी मुझे बचाने मेरे पापा आए और उसे बाहर निकाल दिए। इस दौरान वे खुद गहरे पानी में जाने लगे। इससे पहले कि वे पूरी तरह नदी में नीचे जाने लगे। यह देख हम दोनों ने नदी में उतरे और उन्हें बाहर निकाला।
बच्चों ने बिना अपनी जान की परवाह किए बचाई जान
संतोष देवांगन ने बताया कि वे अक्सर रूद्री नदी में नहाने जाते हैं, लेकिन इस बार गहराई का सही अंदाजा नहीं लगा सके, जिससे यह हादसा हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें थोड़ी बहुत तैराकी आती है, लेकिन उनके बेटे और भतीजे को तैरना नहीं आता। इसके बावजूद, बच्चों ने बिना अपनी जान की परवाह किए उन्हें बचाया। संतोष देवांगन ने दोनों बच्चों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि वे आज उन्हीं की वजह से जिंदा हैं।