तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान रविवार को जंग खत्म करने के लिए शांति समझौते पर राजी हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। वहीं ईरान ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका के साथ कई महीनों तक चली लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक डील यानी MoU को अंतिम रूप दे दिया है।
ट्रम्प ने कहा कि इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी है। ट्रम्प ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘दुनिया के जहाजो, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देश पीस डील पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हाई लेवल की बैठक होगी।
ईरान ने दस्तखत करने से पहले 3 शर्तें रखीं
ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज अभी जारी नहीं किया गया है। हालांकि, ईरानी मीडिया के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में कुछ अहम बातें शामिल हैं।
इनमें युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरान के कुछ फ्रीज्ड फंड जारी करना, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अगले 60 दिनों की बातचीत का ढांचा तय करना शामिल है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका-ईरान वार्ता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं।
गरीबाबादी के मुताबिक अमेरिका को तीन कदम उठाने होंगे- 1. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, 2. युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना, 3. ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना।
साइन के बाद होर्मुज से हटेगी अमेरिकी नाकेबंदी
अमेरिकी सेना को निर्देश मिला है कि अगर शुक्रवार को ईरान के साथ पीस डील (MoU) पर साइन हो जाते हैं, तो उसी दिन होर्मुज स्ट्रेट में जारी अमेरिकी नाकेबंदी हटा दी जाए। यह जानकारी एक अमेरिकी अधिकारी ने दी है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने रविवार को समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि वह ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे रहे हैं। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद खोला जाएगा, ताकि वहां मौजूद संभावित बारूदी सुरंगों को हटाया जा सके।
अमेरिका ने यह नौसैनिक नाकेबंदी अप्रैल के मध्य में लगाई थी, जब युद्ध शुरू हुए करीब छह सप्ताह हो चुके थे। हालांकि अमेरिकी अधिकारी ने यह भी कहा कि फिलहाल यही योजना है, लेकिन शुक्रवार तक हालात बदल भी सकते हैं।
जंग खत्म होने की आहट के बीच शेयर बाजार में तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते की घोषणा के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजारों में बहुत तेजी देखी गई।
जापान का प्रमुख शेयर सूचकांक निक्केई 225 सुबह के कारोबार में 5% से ज्यादा उछल गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5.7% चढ़ा।
ताइवान का ताइएक्स 2.7% बढ़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 करीब 1.5% मजबूत हुआ।
अमेरिकी शेयर बाजारों के फ्यूचर्स में भी तेजी रही। S&P 500 से जुड़े फ्यूचर्स करीब 1% और तकनीकी कंपनियों पर आधारित नैस्डैक फ्यूचर्स 1.6% तक चढ़ गए।
सीजफायर के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 4% गिरावट
अमेरिका-ईरान ने करीब 107 दिन बाद युद्ध खत्म करने के लिए शांति समझौते पर सहमति जताई है। इस घोषणा के बाद इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
सोमवार को एशियाई कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। क्रूड ऑयल का भाव 4.39 फीसदी टूटकर 81.15 डॅालर प्रति बैरल पर आ गया।
दुनियाभर के देशों ने पीस डील का स्वागत किया
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का दुनिया के कई देशों और नेताओं ने स्वागत किया है।
कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष अच्छी भावना के साथ आगे बढ़ेंगे, ताकि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस समझौते को एक अहम कदम बताया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब समेत मध्यस्थता में शामिल देशों की सराहना की।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समझौता ज्ञापन को जल्द और पूरी तरह लागू करने की अपील की।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन ने भी समझौते का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने वाले बयानों, उकसावे वाली गतिविधियों और किसी भी भड़काऊ कार्रवाई से बचने की अपील की।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीजी ने सभी पक्षों से इस अवसर का उपयोग बातचीत और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति स्थापित करने के लिए करने की अपील की।




