रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र से पहले आज कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक होगी। शाम 5 बजे नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सरकारी बंगले पर होने वाली इस बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति तय की जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर भी अंतिम फैसला हो सकता है।
कांग्रेस इस बार मानसून सत्र में पूरी तैयारी के साथ उतरने की रणनीति बना रही है। यदि विधायक दल की बैठक में सहमति बनती है तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है।
इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, उनमें प्रमुख रूप से—
नकटी गांव में कथित तौर पर प्रधानमंत्री आवास तोड़े जाने का मामला
प्रदेश की कानून-व्यवस्था
जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग
किसानों को खाद की किल्लत और खेती से जुड़ी समस्याएं
बिजली दरों में बढ़ोतरी
महिलाओं की सुरक्षा
बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में देरी
कांग्रेस का मानना है कि इन मुद्दों पर सरकार को विधानसभा में घेरा जा सकता है और पूरे सत्र के दौरान इन पर तीखी बहस होगी।
बैठक में तय होगी विपक्ष की रणनीति
भाजपा की रणनीति बैठक के बाद अब कांग्रेस भी अपने विधायकों के साथ मंथन करेगी। विधायक दल की बैठक में यह तय किया जाएगा कि सदन में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी और सरकार को किस तरह घेरा जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सभी विधायक बैठक में शामिल होंगे।
कल से शुरू होगा पांच दिन का मानसून सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, वहीं सत्ता पक्ष भी जवाब देने की रणनीति बना चुका है।
1033 सवालों का जवाब देगी सरकार
इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 प्रश्न लगाए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के तहत अधिकतम 20-20 सवाल पूछे हैं। खास बात यह है कि सवाल पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में पांच दिन के सत्र में सरकार को लगभग हर विभाग से जुड़े सवालों का जवाब देना पड़ सकता है।
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव?
अविश्वास प्रस्ताव पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है। विपक्ष किसी एक या कई बड़े मुद्दों को आधार बनाकर यह प्रस्ताव पेश कर सकता है। प्रस्ताव स्वीकार होने पर सदन में सरकार के कामकाज पर विस्तृत चर्चा होती है और अंत में मतदान के जरिए यह तय किया जाता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास है या नहीं।




