कोरबा। छत्तीसगढ़ के प्रथम त्योहार हरेली तिहार का उत्साह कोरबा जिले में गांव से लेकर शहर तक देखने को मिला। बुधवार को हरेली के मौके पर किसान परिवारों ने अपने कृषि यंत्रों की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल और खेती में समृद्धि की कामना की।
सुबह से ही घरों और खेतों में पूजा-पाठ का दौर शुरू हो गया। वहीं बच्चों और युवाओं ने गेड़ी चढ़कर त्योहार की खुशियां मनाईं और एक-दूसरे को हरेली की बधाई दी।
कृषि यंत्रों को सजाकर की पूजा
हरेली को छत्तीसगढ़ में कृषि और प्रकृति से जुड़ा प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दिन किसान हल, कुदाल, ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर उन्हें फूल और गोबर से सजाते हैं। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर अच्छी पैदावार और खेती में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना की जाती है।
नकटीखार-दादर में गेड़ी बना आकर्षण
कोरबा के नकटीखार, दादर और खरमोरा बस्तियों में सुबह से ही त्योहार का माहौल रहा। पूजा के बाद बच्चों और युवाओं में गेड़ी चढ़ने को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कई जगह गेड़ी दौड़ और पारंपरिक खेलों का भी आयोजन किया गया। बुजुर्गों ने बच्चों को आशीर्वाद दिया और खेती-किसानी से जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी।
शहर में भी घर-घर हुआ हरेली पूजन
सीतामढ़ी, पुरानी बस्ती, रामनगर और आसपास के वार्डों में भी हरेली की रौनक रही। शहरी किसान परिवारों ने कृषि उपकरणों के साथ दुपहिया और चारपहिया वाहनों की भी पूजा की। महिलाओं ने घरों के द्वार पर गोबर से हरेली की पारंपरिक चित्रकारी बनाई और घरों को सजाया। शाम तक कई स्थानों पर गेड़ी प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
नकटीखार निवासी आशीष दास महंत ने बताया कि हरेली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि खेती और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। इस दिन कृषि यंत्रों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताकर किसान नए कृषि सीजन की शुरुआत के लिए उत्साह और ऊर्जा प्राप्त करते हैं।




