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छत्तीसगढ़: प्रदेश के इस जिले में स्वाइन फ्लू की दस्तक, बच्ची में एच1एन1 की पुष्टि, घर-आसपास सर्वे; परिवार के भी लिए सैंपल

दुर्ग।  जिले में स्वाइन फ्लू का पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। जिले के एक निजी अस्पताल में भर्ती 2 साल 11 माह की बच्ची की जांच में एच1एन1 वायरस की पुष्टि हुई है। बच्ची को तेज बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अभी उसका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर रख रहे हैं।

दुर्ग के सिविल सर्जन डॉ. आशीष कुमार मिंज ने बताया कि बच्ची को करीब दो दिन पहले तेज बुखार और दूसरे फ्लू जैसे लक्षणों के बाद अस्पताल लाया गया था। लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू की आशंका हुई। इसके बाद बच्ची की आरटी-पीसीआर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में एच1एन1 वायरस की पुष्टि हुई।

रिपोर्ट मिलते ही घर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्ची की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके घर और आसपास के इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। टीम घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ले रही है। बच्ची के परिवार के दूसरे सदस्यों के भी सैंपल लिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परिवार में किसी और को संक्रमण तो नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग अब बच्ची के संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटा रहा है। ताकि संक्रमण के संभावित फैलाव को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना है। विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

5 साल से कम उम्र के बच्चों में खतरा ज्यादा बताया जा रहा है कि संक्रमित बच्ची की उम्र 5 साल से कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 5 साल से कम उम्र के बच्चे फ्लू की वजह से गंभीर बीमारी के ज्यादा खतरे वाले समूह में आते हैं। फ्लू का संक्रमण खांसने, छींकने और बात करने के दौरान निकलने वाले छोटे कणों से एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकता है। बंद और भीड़ वाली जगहों पर इसके फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

सिर्फ बुखार नहीं, इन लक्षणों पर भी रखें नजर स्वाइन फ्लू में अचानक तेज बुखार के साथ खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और नाक बहने जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लक्षणों को सामान्य बुखार या मौसम बदलने का असर मानकर लंबे समय तक घर पर इलाज करना ठीक नहीं है। खासकर छोटे बच्चों में तेज या मुश्किल से सांस लेना, लगातार बुखार रहना या हालत बिगड़ना दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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