छत्तीसगढ़

83 जातियों को OBC में शामिल करें- बोली ममता सरकार, एनसीबीसी ने उठा दिए सवाल

नईदिल्ली : लोकसभा चुनाव 2024 से पहले देश में जातिगत समीकरण को लेकर हंगामा बरपा है. एक तरफ जहां कांग्रेस ओबीसी समुदाय के जातिगत सर्वेक्षण की मांग कर रही है. वहीं, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने केंद्रीय ओबीसी सूची में 83 जातियों को शामिल करने की सिफारिश की है जिनमें 73 मुस्लिम समुदाय से हैं. नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लास (एनसीबीसी) ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है. एनसीबीसी ने इसके साथ ही कुछ समुदायों को राज्य ओबीसी सूची में शामिल करने पर भी आपत्ति जताई.

एनसीबीसी ने इस सिफारिश का कड़ा विरोध किया है क्योंकि इसमें मुस्लिम समुदायों को अधिक प्राथमिकता दी गई. आयोग ने इस बारे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राज्य सरकार की शिकायत करने का फैसला किया. एनसीबीसी की मुख्य आपत्ति इस बात से है कि ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए सिफारिश की गई 83 जातियों में से 73 सिर्फ मुस्लिम समुदाय से हैं. पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने इन जातियों के सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के ताजा आंकड़े पेश नहीं किए. इससे राज्य में रहने वाली मूल बंगाली जाति के पिछड़े समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है.

एनसीबीसी के अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर ने कि 83 जातियों को ओबीसी में शामिल करने की सिफारिश तो कर दी लेकिन राज्य सरकार ने इससे जुड़ा डेटा उपलब्ध नहीं कराया. सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में उचित मानदंड निर्धारित किए गए जिन्हें सुनिश्चित करने की जरूरत है.

हंसराज गंगाराम अहीर ने आगे कहा- इस पर राज्य सरकार की ओर से उचित जवाब भी नहीं दिया जा रहा है. यह मामला छह महीने से अधिक समय से हमारे संज्ञान में है. हमने बंगाल के मुख्य सचिव को 4 बार तलब किया है लेकिन अधिकारी न तो पेश हुए और न ही राज्य सरकार ने सिफारिश के पक्ष में कोई डेटा दिया है. अब हम इन प्रस्तावों को अस्वीकार करने के लिए मजबूर हैं.

बीजेपी ने उठाए सवाल

मामले पर आयोग की आपत्ति के बाद बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख और बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने रविवार (3 मार्च) को एक्स पर पोस्ट कर ममता बनर्जी की सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा कि बंगाल पिछड़ेपन के मानचित्रण के लिए नए आंकड़े उपलब्ध कराने में विफल रहा. राज्य में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए ओबीसी प्रमाणपत्र और आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं. ममता बनर्जी आग से खेल रही हैं. उनकी तुष्टीकरण की राजनीति ने बंगाल के सामाजिक ताने-बाने को पहले ही तोड़ दिया है.