छत्तीसगढ़

SC के पूर्व जज बोले-देश में अभिव्यक्ति की आजादी की कमी, कानून मंत्री ने कहा- वो PM को गाली देने वाले

नईदिल्ली I सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण की ओर से देश में अभिव्यक्ति की आजादी की कमी की बात कहे जाने के बाद पलटवार करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने आज शनिवार को कहा कि जो लोग चुने हुए लोकप्रिय प्रधानमंत्री को अपशब्द बोलते हैं वो लोग अभिव्यक्ति की आजादी के बारे में रो रहे हैं.

देश की सबसे बड़ी अदालत के रिटायर जज बीएन श्रीकृष्ण ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था, “आज, चीजें बहुत खराब हो गई हैं. हमें स्वीकार करना होगा कि अगर मैं एक सार्वजनिक स्थान पर खड़ा होकर ये कहता हूं कि मुझे प्रधानमंत्री पसंद नहीं तो कोई मेरे यहां छापेमारी हो सकती है, मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है और बिना कोई कारण बताए जेल में डाला जा सकता है.”

हमें विरोध करना चाहिएः रिटायर जज

रिटायर जज ने यह भी कहा कि अब यह एक ऐसी चीज है जिसका हम सभी को नागरिक के रूप में विरोध करना चाहिए. यह इंटरव्यू सोशल मीडिया में वायरल हो गया और लोगों ने इस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं भी दीं.

रिटायर जज की टिप्पणी पर बिना किसी का नाम लिए कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ऐसे लोग 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए इमरजेंसी के बारे में कभी बात नहीं करेंगे और कभी भी क्षेत्रीय दलों के कुछ मुख्यमंत्रियों की आलोचना करने की हिम्मत नहीं करेंगे.

…तो संस्था को नीचा दिखा रहेः कानून मंत्री

कानून मंत्री रिजिजू ने ट्वीट करते हुए आगे लिखा कि वो लोग जो हर समय बिना किसी प्रतिबंध के लोकप्रिय निर्वाचित प्रधानमंत्री को अपशब्द बोलते रहते हैं, वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में रो रहे हैं. वे कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए इमरजेंसी के बारे में कभी बात नहीं करेंगे और न ही कुछ क्षेत्रीय पार्टी के मुख्यमंत्रियों की आलोचना करने की हिम्मत करेंगे.

उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज ने वास्तव में ऐसा कहा है या नहीं. अगर यह सच है तो यह बयान अपने आप में उस संस्था को नीचा दिखाने वाला है जिसकी उन्होंने सेवा की है.”

‘क्या सिविल सेवक कानून, शासन पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं?’ शीर्षक वाले साक्षात्कार में, श्रीकृष्ण तेलंगाना कैडर से संबंधित एक आईएएस अधिकारी के बाद कानून और शासन के मामलों पर अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने के लिए सिविल सेवकों की स्वतंत्रता पर चल रही बहस के बारे में बात कर रहे थे। बिलकिस बानो मामले में सामूहिक बलात्कार और हत्या के दोषी 11 लोगों की रिहाई पर दुख व्यक्त किया।

इंटरव्यू में Can civil servants express their views on law, governance? टाइटल पर दिया गया था. जस्टिस श्रीकृष्ण कानून और शासन के मामलों पर अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने के लिए अधिकारियों की आजादी को लेकर चल रही बहस पर चर्चा कर रहे थे. बिलकिस बानो केस में गैंग रेप और हत्या के दोषी 11 लोगों की रिहाई पर भी उन्होंने दुख व्यक्त किया.

द पीपुल्स ऑफिसर के नाम से मशहूर स्मिता सभरवाल ने कहा कि बिलकिस बानो केस के दोषियों की रिहाई के बारे में पढ़कर वह एक महिला और एक सिविल सर्वेंट के रूप में अविश्वास महसूस करती हैं. 2001 बैच के आईएएस अधिकारी ने ट्वीट किया था कि एक महिला और एक सिविल सर्वेंट के रूप में मैं #BilkisBanoCase पर न्यूज पढ़कर यकीन नहीं कर पा रही हूं.