कोरबा। एनटीपीसी कोरबा में ठेका मजदूरों के सब्र का बांध बुधवार को फूट पड़ा। अपनी मांगों को लेकर हजारों की संख्या में मजदूरों ने गेट नंबर-2 पर मोर्चा खोल दिया और काम पूरी तरह बंद कर ‘चक्काजाम’ जैसी स्थिति पैदा कर दी। मजदूरों की इस अप्रत्याशित एकजुटता ने एनटीपीसी प्रबंधन की नींद उड़ा दी है।
विभिन्न निजी कंपनियों के अंतर्गत काम करने वाले ये मजदूर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। हंगामे की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। हालांकि, प्रबंधन और पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए कुछ श्रमिक प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए अंदर बुलाया, लेकिन समाधान न निकलता देख अधिकांश मजदूर टस से मस नहीं हुए और गेट के बाहर ही डटे रहे।
मजदूरों की दो टूक: ‘शोषण बंद करो, हक दो’
आंदोलनकारी श्रमिकों की मांग स्पष्ट है—उन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय दिया जाए और 8 घंटे की शिफ्ट के बाद कराए जाने वाले अतिरिक्त काम का नियमानुसार ओवरटाइम (OT) भुगतान हो। मजदूरों का आरोप है कि उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर केवल आश्वासन मिलते हैं। हालांकि प्रबंधन के खौफ से कई मजदूर कैमरे पर बोलने से कतराते रहे, लेकिन उनका आक्रोश काम बंद हड़ताल के रूप में साफ दिखाई दिया।
फिलहाल, एनटीपीसी परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। प्रशासन स्थिति को काबू में करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मजदूरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें धरातल पर पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन थमेगा नहीं।



