रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही जारी है। सदन में सक्ती के वेदांता प्लांट हादसे में 25 लोगों की मौत का मामला प्रश्नकाल में गूंजा। अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी और जांच को लेकर विपक्ष ने सरकार से तीखे सवाल किए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में हंगामा किया और बाद में वॉकआउट कर दिया।
सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, ‘माननीय नेता जी, अविश्वास प्रस्ताव भी दे दिए हो और प्रश्न भी पूछ रहे हैं।’ इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने जवाब दिया, ‘अरे यार, आप हमेशा गड़बड़ करते हो… लगता है, दिनभर चढ़ी रहती है आपको। वो कर लेंगे जो भी करना है अविश्वास प्रस्ताव में, लेकिन किसके कारण ला रहे हैं, ये अभी बताने तो दो।’
वहीं, सदन में रायपुर की जलापूर्ति, अमृत मिशन और जल जीवन मिशन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। रायपुर शहर में पेयजल संकट, टैंकरों से सप्लाई, अधूरी योजनाओं और अवैध नल कनेक्शनों को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक और सवाल-जवाब देखने को मिले।
राज्य गठन के बाद 10वां अविश्वास प्रस्ताव
राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में लाया जाने वाला 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। इससे पहले 9 बार सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार संबंधित सरकारें सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रहीं। आज (मंगलवार) सदन में आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विधानसभा अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए दिन तय करेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव क्यों अहम?
अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता। विपक्ष इस बहस के जरिए सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठाता है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद मतदान होता है। यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वत: गिर जाता है।
इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष रखेगी।
विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। ऐसे में संख्या बल बीजेपी के पक्ष में है। यही वजह है कि प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक है, जबकि गणित सरकार के पक्ष में दिखाई देता है।




