छत्तीसगढ़

ट्रेन में यात्री की जान की कीमत सिर्फ 15 हजार… किरकिरी के बाद रेलवे ने सुधारी भूल

नईदिल्ली I उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में नीलांचल एक्सप्रेस में एक यात्री हरिकेश कुमार दुबे की गर्दन में लोहे की छड़ घुसने से हुई मौत के बाद रेलवे प्रशासन के मरहम पर सवाल उठने लगे हैं. दरअसल, यात्री की मौत के बाद रेलवे की ओर से मुआवजे के तौर पर 15 हजार रुपए दिए गए, लेकिन मृतक के पिता संतराम दुबे ने लेने से इनकार कर दिया. मृतक के भाई ने कहा कि किसी की मौत की कीमत नहीं लगानी चाहिए.

परिजनों ने रेलवे के लापरवाह कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं, किरकरी होने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे विभाग की गलती को सुधारा और मृतक के परिवार को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया. उधर, मृतक के पिता ने मृतक बेटे की पत्नी के लिए रेलवे से नौकरी की मांग की है. हालांकि, रेलवे के अधिकारी ने निराशाजनक बात कहते हुए मृतक के परिजनों से कहा कि आप कोर्ट जाइए और वहीं से आपको रेलवे विभाग से कुछ रिलीफ मिल सकेगी.

मृतक के दो मासूम बच्चे, 15 देकर बेटे का अपमान

मृतक के पिता संत राम दुबे ने बताया कि रेलवे अधिकारी एसके शुक्ला ने बेटे की मौत के बदले 15 हजार रुपए दे रहे थे, लेकिन हमने लेने से इनकार कर दिया. मृत बेटे की दो संताने हैं, उनका अब गुजर कैसे होगा. इसलिए बेटे की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की है. आरोप है कि बेटे की मौत के लिए रेलवे विभाग जिम्मेदार है.

खिड़की का शीशा तोड़कर लोहे की छड़ यात्री की गर्दन में घुसी

आपको बता दें कि बीती शुक्रवार यानी दो दिसंबर को दिल्ली से चली नीलांचल एक्सप्रेस (12876) से शुक्रवार की सुबह करीब पौने नौ बजे दनवर सोमना इलाके से गुजर रही थी, तभी एक लोहे की छड़ खिड़की का शीशा तोड़कर सुल्तानपुर के चांदा थाना क्षेत्र के गोपीनाथपुर गांव निवासी हरिकेश कुमार दुबे (34) की गर्दन में जा घुसी, जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गए. बताया गया कि ट्रेन के स्टाफ ने तुरंत इसकी सूचना करीब 35 किलोमीटर दूर अलीगढ़ रेलवे स्टेशन के अधिकारियों को दी. हालांकि, रेल कर्मचारी दुबे को उतारकर तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.